नहीं लगेगी 'तारीख पर तारीख', हाईकोर्ट ने किया बड़ा काम
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हाईकोर्ट ने मुकदमों की लिस्टिंग से पैदा होने वाली मौजूदा समस्या का समाधान निकालते हुए नई प्रणाली लागू कर दी है। यह व्यवस्था मंगलवार 12 अक्तूबर से लागू हो गई है। इससे वादकारियों और वकीलों दोनों को राहत मिलेगी। मुकदमों के निश्चित समयावधि में निपटने की उम्मीद जताई जा रही है।
नई व्यवस्था के अनुसार दो अक्तूबर या उसके बाद सूचीबद्ध किए गए सभी मुकदमों में तारीख तय कर दी जाएगी। इसी प्रकार से जो याचिकाएं एक जुलाई 2015 या इसके बाद दाखिल हैं, उनकी तारीख उन याचिकाओं पर पारित आदेश के अनुसार लगाई जाएगी।
एक जुलाई से दाखिल अर्जियों पर जो आदेश हुए हैं, उन पर अमल नहीं होगा। ऐसे मामलों में नए सिरे से अर्जी देनी होगी।
वेबसाइट पर ही देखी जा सकेगी मुकदमों की सूची
लिस्टिंग के लिए दाखिल अर्जियों के साथ अब नए सिरे से ब्यौरा देना होगा। इसमें पूर्व में पारित आदेश, समय पूर्व सुने जाने की आवश्यकता, केस सुनवाई के लिए स्वीकृत है या नहीं, अधिवक्ता नाम और एडवोकेट रोल नंबर, विपक्षी वकील का नाम और एडवोकेट रोल नंबर आदि की जानकारी देनी आवश्यक होगी।
सीनियर सिटीजन को अर्जी के साथ आयु का साक्ष्य देना होगा। नई दाखिल होने वाली याचिकाओं के लिए अलग प्रोफार्मा बनाया गया है। इसमें केस का ब्यौरा, याची और विपक्षी के अधिवक्ता का ब्यौरा, याची यदि किसी अपराध में लिप्त है तो उसका ब्यौरा, अधीनस्थ न्यायालय या हाईकोर्ट में मुकदमे से संबंधित वादों का ब्यौरा देना अनिवार्य होगा।
हाईकोर्ट के उपनिबंधक लिस्टिंग के अनुसार नई व्यवस्था मुकदमों की सुनवाई की तिथि की अनिश्चितता को समाप्त करने के लिए लागू की गई है। अभी तक मुकदमों की सूची के लिए प्रकाशित कॉज लिस्ट अगले वर्ष जनवरी से बंद की जा रही है। अब सूची हाईकोर्ट की वेबसाइट पर ही देखी जा सकेगी।