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CPMT पेपर लीक: छुपा सच जानकर रह जाएंगे सन्न

Wed, 27 May 2015 08:10 AM IST
Updated Wed, 27 May 2015 08:10 AM IST
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hidden story of cpmt paper leak accused

लखनऊ में सीपीएमटी का पेपर सॉल्व करने वाले गिरोह के खुलासे से जहां मेडिकल की तैयारी करने वाले सन्न रह गए हैं, वहीं बस्ती और गोरखपुर मंडल के उन घरों में सन्नाटा है, जिनका अपना आरोपियों में शामिल है। पेपर सॉल्वर गिरोह के मास्टमाइंड में शुमार हुए डॉ. राजेश रंजन और कुशीनगर के अच्युतानंद पांडेय को छोड़कर बाकी आरोपियों के घर वाले ही नहीं गांव वाले भी इसे खराब सोहबत का असर मान रहे हैं।

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गोरखपुर में गगहा इलाके के कौड़ीराम का हर शख्स मंगलवार को अवाक था तो पांडेयपार में रहने वाले गंगेश ध्वज सिंह का घर सन्नाटे में घिरा था। जिस बेटे रमन ध्वज सिंह के जल्द डॉक्टर की डिग्री लेकर घर लौटने की उम्मीद घर वाले लगाए थे, उसके एसटीएफ की पकड़ में होने की बात जितना घर वालों को परेशान कर रही थी, उतना ही रमन को करीब से जानने वालों को। हर जगह रमन के जुझारू तेवर और परिवार के संघर्ष की चर्चा थी।
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गंगेश ध्वज सिंह की चार संतानों में तीसरे नंबर के रमन का पढ़ाई से लगाव देखकर इस परिवार ने उसे सकारात्मक माहौल देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। डॉक्टर बनने की चाहत हासिल करने के लिए रमन ने भी मेहनत से समझौता नहीं किया। इंटर पास करने के बाद कानपुर में दो साल तैयारी करने के दौरान ट्यूशन पढ़ाकर खुद का खर्च जुटाया था।
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साल 2012 में चयन के समय सीपीएमटी की मेरिट में वह उसे 16वां स्थान मिला था। लखनऊ केजीएमयू में मेडिकल के दाखिले के खर्च पूरे करने के लिए पिता को दो बीघा जमीन बेचनी पड़ी थी। पढ़ाई का आखिरी साल होने से वह बेटे के साथ घर की तस्वीर बदलने की उम्मीद लगाए थे। रमन ने छोटी बहन की शादी की जिम्मेदारी खुद उठाने का भरोसा भी दिया था लेकिन डॉक्टर की डिग्री मिलने से पहले ही वह एसटीएफ की पकड़ में आ गया। पिता और गांव के लोगों का मानना है कि रमन गलत नहीं है, उसकी सोहबत ने इस नौबत तक पहुंचा दिया होगा।

सीपीएमटी में 67वां स्थान था अभिमन्यु का

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कुशीनगर में पटहेरवा इलाके के अरुसवा गांव में मंगलवार को रोज जैसी हलचल नहीं थी तो रिटायर्ड रोडवेज चालक अनिरुद्ध सिंह के घर सन्नाटा था। लखनऊ केजीएमयू में इस साल एमबीबीएस फाइनल ईयर की पढ़ाई पूरी करके बेटे अभिमन्यु के नाम के साथ डॉक्टर का खिताब चस्पा होने की खबर का इंतजार कर रहा यह परिवार ताजी खबर ने सन्न है।

घर वाले ही नहीं गांव के लोग भी हैरान हैं। आसपास रहने वालों ने बताया कि चार भाई-बहन में तीसरे नंबर का अभिमन्यु बचपन से ही पढ़ाई को लेकर गंभीर था। रुझान देखकर पिता ने जूनियर के बाद की पढ़ाई इलाहाबाद में कराई। डॉक्टर बनाना सपना था तो बेटे ने भी लक्ष्य तक पहुंचने के लिए मेहनत में कसर नहीं छोड़ी।

सीपीएमटी में चयन के दौरान प्रदेश की सूची में उसका 67वां स्थान था। पिता ने कहा, कुछ समझ नहीं आ रहा कि यह क्या हुआ और कैसे हुआ। अभिमन्यु चर्चा पर मां फफक पड़ीं। बोलीं, बेटा सीधा है। उसे कुछ बुरे लोगों ने अपनी संगत में लिया। ग्राम प्रधान योगेंद्र प्रसाद सहित अभिमन्यु के घर के आसपास रहने वाले वीरेंद्र, कलामत अंसारी, रियासत अंसारी, दिनेश कुमार सिंह का नजरिया भी यही है कि दोष अभिमन्यु के साथियों का है। वह खुद ऐसा नहीं कर सकता।

परीक्षा में जाने की बात कहकर निकला था अंशुमान

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बस्ती के सुपेलवा मोहल्ले में मंगलवार को हर जगह सीपीएमटी में सेंधमारी करने वाले उस गिरोह की चर्चा थी, जिसे लखनऊ एसटीएफ ने ठीक उस वक्त पकड़ा, जबकि प्रदेश भर में मेडिकल की प्रवेश परीक्षा कराई जा रही थी। पकड़े गए लोगों में कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस पूरा कर चुके अंशुमान मिश्रा का शामिल होना सभी को चौंका रहा था।

अंशुमान की मां स्वास्थ्य विभाग में मिडवाइफ हैं, जबकि पिता सत्यदेव मिश्रा घर पर ही रहते हैं। पिता ने कहा कि अखबार पढ़कर जानकारी हुई लेकिन यकीन नहीं हो रहा कि बेटा ऐसा कुछ कर सकता है। मां ने कहा कि उसे डॉक्टर बनाने के लिए पूरे घर ने तमाम मौके पर जरूरी खर्चों से समझौता किया। पढ़ने में तेज था सो सलेक्शन होते ही उससे बेहतर नतीजे की उम्मीदें बंधने लगी थीं।

पिछले सप्ताह कानपुर में उससे मिलने गए थे तो उसके और बहू के बीच से ऐसा कुछ सुनने को नहीं मिला, जिससे अनहोनी का अंदेशा लगाते। न जाने कैसे लड़का इस जाल में फंस गया। सोमवार की रात में बहू ने फोन कर बताया कि अंशुमान कालेज में परीक्षा देने जाने की बात कहकर निकले थे, लेकिन अब तक लौटे नहीं। शाम से ही फोन स्विचऑफ है। तब से चिंता में थे और मंगलवार सुबह अखबार ने जो बताया उस पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं।

रकम तैयार रखो...नौकरी हम लगवाएंगे

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सीपीएमटी का पेपर लीक कराने और सॉल्व कॉपी परीक्षार्थियों तक पहुंचाने की कोशिश के आरोप में पकड़े गए कुशीनगर के अच्युतानंद पांडेय के गांव का परिदृश्य अन्य आरोपियों के घर-गांव से उलट मिला।

तुर्कपट्टी थानाक्षेत्र के सपहां में घर वालों ने जहां इस मामले में बातचीत से इन्कार कर दिया, वहीं गांव वालों ने बताया कि वह करीब 15 साल से बाहर है। कभी-कभी गांव आना होता है तो खुद को दिल्ली में स्थापित बताते हुए यहां के लड़कों को नौकरी या प्रतियोगी परीक्षाओं में सलेक्शन कराने की गारंटी देता है।

शाही अंदाज के रहन-सहन पर यकीन करके कई नौजवानों ने दो साल पहले इंजीनियरिंग या मेडिकल में सलेक्शन की उम्मीद में उसे रकम थमा दी थी। काम न होने पर कुछ शिकायतें पुलिस तक पहुंची लेकिन उसकी तरफ से रकम वापस कर देने पर कोई केस दर्ज नहीं हुआ।

छात्र जीवन में पढ़ाई से ज्यादा छात्र राजनीति में सक्रिय रहे अच्युतानंद ने खुद को स्थापित करने के बाद अपनी पहली पत्नी को छोड़कर दूसरी शादी कर ली, पहली पत्नी से एक बेटी है, जो अलग रहती है।

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