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नक्सलियों से बिना शर्त वार्ता को तैयार हेमंत सोरेन
नई दिल्ली/विनोद अग्निहोत्री
Updated Tue, 23 Jul 2013 12:05 AM IST
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झारखंड में नक्सली समस्या के समाधान के लिए राज्य के नए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन नक्सलियों से बिना शर्त बातचीत को तैयार हैं।
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सोरेन का कहना है कि इसके लिए अगर जरूरत पड़ी तो वह नक्सलियों के बीच उनके ठिकाने पर भी जा सकते हैं। हालांकि हेमंत राज्य में नक्सली समस्या को अपने लिए चुनौती नहीं मानते हैं।
वह इसे व्यवस्था की कमजोरी बताते हुए कहते हैं कि अभावों और अस्तित्व के संघर्ष में कहीं भी कोई नक्सली बन सकता है। यह जरूरी नहीं कि नक्सली सिर्फ गांवों और आदिवासियों के बीच ही पैदा होते हैं।
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कांग्रेस के साथ झारखंड मुक्ति मोर्चे का गठबंधन होने और मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद पहली बार दिल्ली आए हेमंत सोरेन ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि झारखंड के साथ ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और बिहार के कुछ आदिवासी इलाकों को मिलाकर वृहत झारखंड बनाने का मुद्दा उनकी पार्टी ने अभी छोड़ा नहीं है।
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पार्टी के लिए यह मुद्दा अभी जिंदा है और हम इन इलाकों के आदिवासियों के हितों के लिए संघर्ष करते रहेंगे।
सोरेन कहते हैं कि वह राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासियों की समस्याओं और मुद्दों को उठाएंगे। देश में आदिवासियों की बहुत बड़ी आबादी है।
पूर्वोत्तर से लेकर गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, समेत दक्षिण भारत के राज्यों में भी आदिवासियों की खासी तादाद है।
लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक, आर्थिक और प्रशासनिक क्षेत्र में उनकी हिस्सेदारी नगण्य है। अगर उन्हें उनकी हिस्सेदारी दे दी जाए तो नक्सल समस्या अपने आप खत्म हो जाएगी।
हेमंत के मुताबिक झारखंड का गठन झामुमो और उसके अध्यक्ष शिबू सोरेन के सतत संघर्ष का परिणाम है। उनकी सरकार की प्राथमिकता राज्य में राजनीतिक स्थिरता लाकर विकास की गाड़ी को पटरी पर लाना है। उन्हें पूरी उम्मीद है कि कांग्रेस के साथ झामुमो का गठबंधन दीर्घकालीन होगा।
वह कहते हैं कि चुनाव के फौरन बाद झामुमो ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने की कोशिश की थी, लेकिन तब कांग्रेस नेतृत्व ने उदासीनता दिखाई। मजबूरन उन्हें भाजपा के साथ जाना पड़ा।