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पहाड़ों पर बारिश-बाढ़ का कहर, 68 लोगों की मौत

Tue, 18 Jun 2013 01:26 PM IST
देहरादून/शिमला/मेरठ/ब्यूरो
देहरादून/शिमला/मेरठ/ब्यूरो Updated Tue, 18 Jun 2013 01:26 PM IST
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heavy rain in the mountains, Flood-hit, 65 people confirmed dead

मानसून की वक्त से पहले दस्तक पहाड़ों पर कहर बरपा रही है। उत्तराखंड और हिमाचल में भारी बारिश से सोमवार को हालात बेहद बिगड़ गए।

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बाढ़ और बारिश से उत्तराखंड में 40, हिमाचल में 10 और यूपी के सहारनपुर में 18 लोगों की मौत हो चुकी है। मरने वालों की संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है।

तस्वीरों में देखिए कुदरत का कहर
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चारधाम यात्रा के विभिन्न पड़ावों और धामों में 68 हजार यात्री फंसे हुए हैं। चारधाम के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा भी रोक दी गई है।

उत्तरकाशी से लेकर हरिद्वार और कुमाऊं तक की तमाम नदियां उफान पर हैं।

उत्तराखंड की तबाही से मंत्रालय बेखबर, नहीं पहुंची टीम
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सैकड़ों मकान-दुकान, होटल व गाड़ियां उफनती नदियों की भेंट चढ़ गए हैं। हरिद्वार में गंगा खतरे के निशान से दो मीटर ऊपर बह रही है।

बेकाबू हालात से निपटने के लिए उत्तराखंड सरकार ने सेना, आईटीबीपी की मदद मांगी है।

तस्वीरों में देखिए आसमान से बरसी आफत

सेना के 14 हेलीकॉप्टर तैयार हैं। यूपी में सरसावां और बरेली को बेस बनाया गया है। देहरादून पहुंची राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) की टीम खराब मौसम के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने स्वीकार किया कि स्थिति बदतर है। लोक निर्माण विभाग के मुताबिक उत्तराखंड में 450 सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं।

मौसम केंद्र निदेशक आनंद शर्मा ने बताया कि मंगलवार शाम के बाद मौसम में कुछ हद तक सुधार की संभावना है। हरिद्वार-दिल्ली राजमार्ग पर कई जगह पानी आ जाने से वाहनों की आवाजाही पर भी असर पड़ा है।


राजमार्ग को रुड़की तक वन-वे करना पड़ा है। जनशताब्दी, हेमकुंड एक्सप्रेस, गंगानगर एक्सप्रेस रद्द होने से यात्रियों ने हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर जमकर हंगामा किया।

वहीं, वेस्ट यूपी में गंगा और मालन नदी में उफान के कारण देर शाम बिजनौर के बाढ़ प्रभावित रावली और मंडावर इलाकों में सेना बुला ली गई है।

सहारनपुर में बारिश और बाढ़ से मकान की छत गिरने और कार के बहने से 18 लोगों की जान चली गई।

नकुड़ क्षेत्र के गांवों में 24 घंटे से फंसे लोगों को सेना के हेलीकाप्टर की मदद से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। मेरठ के सरधना में सोमवार को कई मकान जमींदोज हो गए।

कुमाऊं में भी मची तबाही

पिथौरागढ़ जिले के धारचूला में आईटीबीपी, एनएचपीसी और बीआरओ के 16 भवन, गोरखा रेजीमेंट के 12 बैरक, मोटर पुल, आईटीबीपी के सेला कैंप और मुनस्यारी में पावर हाउस के साथ ही कर्मचारियों के क्वार्टर काली और धौली नदी में बह गए।

नामिक में ग्लेशियर के टूटने से गोरी और काली में बाढ़ आ गई है। नैनीताल जिले में 24 घंटे से लगातार हो रही बारिश से झील का जलस्तर पांच फीट ऊपर पहुंच गया है।

बाढ़ और बारिश से लगभग सात हजार ग्रामीणों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है।

कहां कितने यात्री फंसे
- रुद्रप्रयाग जिले में रुद्रप्रयाग से केदारनाथ के बीच करीब 25 हजार यात्री फंसे हैं।
- उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा पर आए करीब 18 हजार यात्री फंसे हैं।
- चमोली में अलकनंदा के तेज बहाव से बदरीनाथ राजमार्ग जगह-जगह बह गया है।
- बदरीनाथ से गोविंदघाट तक करीब 25 हजार तीर्थयात्री फंसे हैं। जोशीमठ में क्रिकेटर हरभजन अभी भी फंसे हुए हैं।

ट्रैकिंग दल ग्लेशियर में फंसा
गोपेश्वर/जोशीमठ। चमोली सीमा से लगे अरवाताल, घसतोली में 40 सदस्यीय ट्रैकिंग दल फंसे हैं। यह ट्रैकिंग दल गंगोत्री से बदरीनाथ जा रहा था।

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