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केदारनाथ में भारी तबाही, मंदिर के अलावा कुछ न बचा
रुद्रप्रयाग/ब्यूरो
Updated Wed, 19 Jun 2013 08:53 AM IST
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उत्तराखंड में मंगलवार को मौसम खुला तो आपदा के गहरे जख्म दिखने लगे। रविवार को आसमान से बरसी आफत के बाद रुद्रप्रयाग से केदारनाथ तक सैकड़ों लोग लापता हैं।
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प्रशासन ने मरने या लापता होने वालों के किसी आंकड़े की पुष्टि तो नहीं की है, लेकिन माना है कि व्यापक जनहानि हुई है। मंगलवार को मौसम साफ होने के बाद राहत और बचाव के लिए पूरा तंत्र हरकत में आया।
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सेना और आईटीबीपी के जवान जगह-जगह बचाव कार्य में जुटे। सेना के हेलीकॉप्टर भी लगाए गए। केदारनाथ से 500 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जबकि अन्य जगहों पर फंसे सैकड़ों लोगों को सुरक्षित ठिकानों स्थानों पर पहुंचाया गया है।
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तस्वीरों में देखिए केदारनाथ की तबाही
अभी भी विभिन्न स्थानों पर करीब 61 हजार यात्रियों के फंसे होने का अनुमान है। केदारनाथ, रामबाड़ा, सोनप्रयाग, चंद्रापुरी में भारी नुकसान की आशंका है। भागीरथी, गंगा समेत अन्य नदियों का जलस्तर घटने से भी बेहाल लोगों को कुछ राहत मिली है।
तस्वीरों में: आसमान से बरसी आफत
शनिवार से सोमवार तक मूसलाधार बारिश से केदारनाथ मंदिर परिसर में भारी बोल्डर और मलबा जमा हो गया है। मंदिर पूरी तरह सही-सलामत है। परिसर के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। हेलीकॉप्टर से रुद्रप्रयाग लाए गए प्रभावितों का कहना है कि मंदिर परिसर सहित विभिन्न स्थानों पर कई शव पड़े हुए हैं।
पुलिस के कई जवानों और सरकारी कर्मचारियों का कुछ पता नहीं है। बताया गया है कि रविवार को धाम में ढाई हजार लोग पहुंचे थे। हवाई सर्वेक्षण के बाद कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने बताया कि लोग जगह-जगह टीलों पर फंसे हुए हैं। गौरीकुंड में फंसे लोगों के लिए पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है।
हवाई सर्वेक्षण में रामबाड़ा की जगह सिर्फ मलबा दिखा
मंदाकिनी का पानी रविवार को रामबाड़ा बाजार में घुस गया था। मंगलवार को हेलीकाप्टर से हवाई सर्वेक्षण में रामबाड़ा की जगह सिर्फ मलबा दिखाई दे रहा है। रामबाड़ा में कितने लोग बचे, कितने हताहत हुए, इसका कोई अंदाजा नहीं है। बताया जा रहा है कि जिस दिन रामबाड़ा में तबाही मची, उस दिन वहां बाहर से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। रामबाड़ा केदारनाथ यात्रा मार्ग का पड़ाव है।
आयुक्त गढ़वाल सुवर्द्धन ने कहा कि बुधवार को छोटे हेलीकाप्टर से यहां पहुंचने की कोशिश की जाएगी। केदारनाथ नेशनल हाईवे पर बसे सोनप्रयाग और चंद्रापुरी में भी फिलहाल नुकसान का आंकलन नहीं हो सका है। रुद्रप्रयाग जिले में अब तक 25 से 30 लोगों के शव निकाले गए हैं। बताते हैं कि बादल फटने के बाद मंदाकिनी में उफान आया था।
हेलीकॉप्टर की मदद से केदारनाथ से पांच सौ लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। हरक सिंह और अन्य अधिकारियों ने हेलीकॉप्टर से केदारघाटी का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया।
आईटीबीपी के जवानों ने चमोली जिले के गोविंदघाट, पांडुकेश्वर और लामबगड़ से दो हजार से भी अधिक तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालकर जोशीमठ पहुंचाया है।
देवप्रयाग-श्रीनगर मार्ग बंद होने से रास्ते में फंसे करीब 300 यात्रियों को देवप्रयाग-पौड़ी और पौड़ी-कोटद्वार मार्ग से गंतव्य तक पहुंचाया गया। उत्तरकाशी में भी यात्री फंसे हैं, लेकिन वे सुरक्षित हैं।
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भूस्खलन कई लोग मलबे में दबे
रुद्रप्रयाग में गौरीकुंड से तीन किमी पूर्व मुंडकटिया के ऊपर एक जगह कई लोग दो दिनों से फंसे हुए थे। मंगलवार को लगभग सवा तीन बजे यहां भूस्खलन शुरू हो गया, जिसमें कुछ लोगों के मलबे में दबने की सूचना है।
मंगलवार को आई सूचना के मुताबिक उत्तरकाशी जिले के उड़री गांव में तीन की मौत हो गई। एक लापता है। चमोली जिले में पांच लोगों की मौत हुई है।