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गर्मी ने तोड़ा सौ साल का रिकॉर्ड, बारिश भी हुई कम

Sat, 03 Oct 2015 09:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गोरखपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, गोरखपुर Updated Sat, 03 Oct 2015 09:22 AM IST
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heat breaks record of 100 year in september

प्रकृति के साथ हो रहे खिलवाड़ का सीधा नतीजा मौसम की मार के रूप में दिखने लगा है। इसकी बानगी सितंबर महीने के तापमान के विश्लेषण में देखी जा सकती है। इस बार सितंबर महीने की गर्मी ने पिछले 100 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

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मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 100 साल बाद इस महीने में पूरे 30 दिन औसत तापमान सामान्य से अधिक रहा है, जबकि अन्य वर्षों में यह आंकड़ा 20 से 25 दिन के बीच ही रहा है।
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मौसम विज्ञानीकैलाश पांडेय ने बताया कि पूरे महीने में अधिकतम औसत तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से दो से तीन डिग्री अधिक है जबकि न्यूनतम औसत तापमान 20.9 डिग्री रहा, जो सामान्य से 0.5 से दो डिग्री अधिक है। ( सभी फोटो फाइल)
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बारिश भी हुई कम

heat breaks record of 100 year in september

उनके अनुसार यह स्थिति भी 40 साल बाद आई है। मौसम विज्ञानी शफीक अहमद इसकी वजह वातावरण में धूल की परत यानी एरोसोल का बनना, मानसून का कमजोर होना और धरती पर अधिक से अधिक कंक्रीट का इस्तेमाल होना बता रहे हैं।

एरोसोल के बारे उन्होंने बताया कि इसमें जमीन से 12-14 किलोमीटर की ऊंचाई पर धूल की धुंध बन जाती है। जिससे धूप छनकर धरती तक तो पहुंच जाती है, लेकिन परावर्तित होकर वापस नहीं लौट पाती, जिससे ग्लोबल वार्मिंग बढ़ जाती है।

शफीक अहमद ने बताया कि मानसून के कमजोर होने से औसत वर्षा में काफी गिरावट दर्ज की गई है। इस वर्ष सितंबर महीने में औसत वर्षा 28.4 मिलीमीटर रही, जो सामान्य से 87 प्रतिशत कम है।

मौसम से हारे किसान पलट रहे खेत

heat breaks record of 100 year in september

उन्होंने बताया कि इस बार अचानक बढ़े तापमान ने मौसम विभाग को भी चौंकाया है। इसे लेकर शोध शुरू हो गया है। मौसम विज्ञानी ने बताया कि इसका असर अक्टूबर महीने में देखने को मिलेगा। मध्य अक्टूबर तक गर्मी को लेकर यही स्थिति बने रहने के आसार हैं।

मौसम की मार से किसान बेहाल है। सितम्बर महीने में बारिश न होने से फसलों पर बुरा असर पड़ा है। कृषि विभाग के आंकलन के मुताबिक, जहां पर सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, वहां पर फसलों को ज्यादा नुकसान हुआ है।

हालत यह है कि मौसम से हारकर कुछ किसानो ने अपने खेतों को पलटकर अगली फसल की तैयारी शुरू कर दी है।

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