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खेमका को जान का खतरा, नहीं मिल रही सुरक्षा
डॉ. सुरेंद्र धीमान/चंडीगढ़
Updated Sat, 08 Dec 2012 10:01 AM IST
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रॉबर्ट वाड्रा और उनकी कंपनियों के नाम संपत्ति की खरीद-फरोख्त की जांच के आदेश देने वाले तत्कालीन महानिदेशक चकबंदी डॉ. अशोक खेमका को सुरक्षा नहीं मिलेगी। खेमका ने यह सुरक्षा फरीदाबाद के चिरसी गांव में एक व्यक्ति के नाम जमीन का इंद्राज रद करने के बाद अपनी जान को खतरा बताकर मांगी थी।
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इंद्राज रद करने के करीब एक महीने बाद खेमका का तबादला बीज विकास निगम के एमडी के तौर पर हो गया था, मगर सुरक्षा मांगने की फाइल मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पास पिछले सप्ताह पहुंची। उस पर मुख्यमंत्री ने सुरक्षा देने के बारे में कोई आदेश नहीं दिया।
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यह है मामला
खेमका ने चिरसी गांव की 51 कनाल 5 मरले जमीन का इंतकाल भूपेंद्र सिंह के नाम दर्ज इंद्राज 21 सितंबर को रद कर दिया था। खेमका ने इंगित किया था कि भूपेंद्र सिंह की उम्र 45 साल है मगर रिकार्ड में जमीन का कब्जा 50-55 साल से दिखाया हुआ था। यह इंद्राज सहायक चकबंदी अधिकारी दलबीर सिंह ने 17 फरवरी 2011 को किया था।
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खेमका ने अतिरिक्त मुख्य सचिव कृष्ण मोहन को सूचित किया था कि यह घोटाला 15 करोड़ रुपये का है। खेमका ने दलबीर सिंह को चार्जशीट भी जारी की थी। खेमका ने खुद के लिए सिक्योरिटी की मांग की थी कि भूपेंद्र सिंह और अन्य प्रभावशाली हैं। उसके बाद उनका तबादला 11 अक्तूबर 2012 को हो गया था।
इसी बीच खेमका ने 12 अक्तूबर 2012 को रॉबर्ट वाड्रा और उनकी कंपनियों के नाम चार जिलों में संपत्ति की खरीद-फरोख्त के जांच के आदेश दिए और 15 अक्तूबर को रॉबर्ट वाड्रा द्वारा डीएलएफ को बेची जमीन का इंतकाल रद करने का आदेश भी दिया। उन्होने खुद की जान को खतरा मीडिया में बताया। पंचकूला डीसीपी पारुल कुश जैन ने एक सिपाही खेमका के पास भेजा, मगर उन्होंने यह कहकर लौटा दिया कि सरकार लिखित आदेश कर सुरक्षा मुहैया कराए।
जिला राजस्व अधिकारी ने भेजी थी रिपोर्ट
राजस्व विभाग ने मुख्यमंत्री को भेजी फाइल में बताया कि डॉ. अशोक खेमका ने अपने पास से भूपेंद्र सिंह के नाम का इंद्राज रद नहीं किया था बल्कि जिला राजस्व अधिकारी ने यह रिपोर्ट भेजकर कहा था कि इंद्राज गलत किया गया। इसलिए राजस्व अधिकारी ने यह कदम उठाया था। अगर किसी की जान को खतरा है तो वह जिला राजस्व अधिकारी को हो सकता है, खेमका को नहीं। अगर सुरक्षा की जरूरत है तो वह जिला राजस्व अधिकारी को है।
यह है मुख्यमंत्री का आदेश
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के उपप्रधान सचिव आरएस दून ने 29 नवंबर को फाइल पर लिखा, ‘मुख्यमंत्री ने देख लिया है। उन्होंने आगे आदेश दिया है कि राज्य के हितों की सुरक्षा के लिए कार्रवाई की जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाए। उन्होंने यह जानने की इच्छा जताई है कि क्या चकबंदी महानिदेशक इस मामले का निर्णय करने में सक्षम थे जिसे पंजाब लैंड रेवेन्यू एक्ट के नियमों के तहत राजस्व अधिकारी द्वारा निपटाया गया था?