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वाड्रा की खातिर हरियाणा ने दी डीएलएफ को जमीन
नई दिल्ली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 10 Oct 2012 01:23 AM IST
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सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल ने सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर नए हमले करते हुए यूपीए सरकार को और परेशानी में डाल दिया है। मंगलवार को उन्होंने कांग्रेस और वाड्रा पर तीखे हमले करते हुए हरियाणा सरकार को भी सफाई देने को मजबूर कर दिया। उन्होंने वाड्रा के पक्ष में उतरने पर केंद्र के मंत्रियों की भी खिंचाई की। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार ने वाड्रा के कारण डीएलएफ को लाभ पहुंचाया।
किसानों की अस्पताल बनाने के लिए ली गई 30 एकड़ जमीन डीएलएफ को एसईजेड यानी सेज (स्पेशल इकोनॉमिक जोन) बनाने के लिए दे दी गई। तब वाड्रा के इस कंपनी में 50 फीसदी शेयर थे। इतना ही नहीं इस कंपनी को जमीन देने के लिए टेंडर निकाले जाने के बाद शर्त बदलकर दो अन्य कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया।
किसानों के साथ मीडिया से रू-ब-रू हुए केजरीवाल ने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार वाड्रा के लिए डीएलएफ की एजेंट के रूप में काम कर रही है। डीएलएफ को फायदा पहुंचाने के लिए सभी नियमों को ताक पर रखा गया। उन्होंने कहा कि डीएलएफ ने वाड्रा को ब्याज रहित 65 करोड़ रुपये नहीं, बल्कि 85 करोड़ रुपये का लोन दिया। वाड्रा की कंपनी ने रजिस्ट्रार के पास गलत बैलेंस शीट फाइल की।
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केजरीवाल ने हरियाणा सरकार से श्वेतपत्र जारी करने की मांग रखते हुए कहा कि वाड्रा के सहयोग से उसने डीएलएफ को कई फायदे पहुंचाए। श्वेतपत्र जारी करके हरियाणा सरकार बताए कि दस साल में सरकार ने इस कंपनी को क्या-क्या फायदे दिए। यह बात सामने आनी चाहिए कि आखिर कांग्रेस और वाड्रा के बीच क्या रिश्ते हैं? अगर सरकार के मंत्री बचाव में उतर रहे हैं तो इसकी क्या वजह है।
उन्होंने कहा कि वाड्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। केजरीवाल ने मांग की कि इस मामले की सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज से जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जितने सबूत पेश किए गए हैं वह आयकर की छापेमारी के लिए पर्याप्त हैं, लेकिन ऐसा अधिकारी नहीं करेंगे क्योंकि केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम आयकर रिटर्न ठीक भरे जाने की बात कह रहे हैं। क्या वह आयकर विभाग के अधिकारी हैं? या पेपर्स की स्क्रूटनी करते हैं?
उन्होंने बताया कि हरियाणा के मानेसर, वजीराबाद और गुड़गांव के किसानों ने सबूत दिए हैं। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने भी जमीन अधिग्रहण के मुद्दे पर कहा है कि डीएलएफ और हरियाणा सरकार के बीच साठगांठ है। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएलएफ एसईजेड कंपनी बनी तो रॉबर्ट वाड्रा इसके 50 फीसदी के शेयर होल्डर बन गए। बाद में उन्होंने डीएलएफ को यही शेयर वापस बेच दिए। आखिर एक वर्ष में क्या हुआ इसकी जांच होनी चाहिए? इसके पीछे कुछ न कुछ बात है। क्या हरियाणा सरकार की डीएलएफ पर मेहरबानी से इसकी कीमत चुकाई गई।
केजरीवाल का ‘पंच’
1 - गुड़गांव में 30 एकड़ जमीन अस्पताल के लिए थी। हरियाणा सरकार ने सेज के लिए डीएलफ को दी। लोग अदालत में गए। सेज हुआ रद्द।
2 - डीएलएफ के सेज में वाड्रा एक साल के लिए 50 फीसदी के शेयर होल्डर थे। साल भर बाद वाड्रा ने शेयर फिर डीएलएफ को बेच दिए।
3 - अंतरराष्ट्रीय स्तर की तमाम बोलियों को रद्द करते हुए हरियाणा सरकार ने जमीन डीएलएफ को दी।
4 - डीएलएफ की हित साधक कंपनियों ने मानेसर में किसानों से जमीन खरीदी। सरकार ने भूमि अधिग्रहण रद्द किया। अदालत ने इस पर स्टे दिया।
5 - 1700 करोड़ रुपये मूल्य की 350 एकड़ जमीन डीएलएफ को दी गई। किसानों को सरकार ने 20 लाख रुपये प्रति एकड़ दिए गए। डीएलएफ ने जमीन 5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से ली।
सरकार का तर्क
- हमने वाड्रा के साथ व्यवसाय करने वाली कंपनियों की जांच कराई है। हमारे रिकॉर्ड के मुताबिक प्राथमिक आधार पर हमें कोई अनियमितता नहीं लगती। जहां तक आगे के कदम का सवाल है, मुझे नहीं लगता कि कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति राह चलते किसी के आरोपों पर कार्रवाई करेगा।
- वीरप्पा मोइली, कंपनी मामलों के मंत्री
कांग्रेस का बचाव
केजरीवाल और उनके सहयोगी सिर्फ प्रचार पाने के लिये पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के परिवार के एक सदस्य पर रोज एक ही तरह के बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनके पास दस्तावेज हैं तो वह उन्हें मीडिया को दिखाने के बजाय कानून का दरवाजा खटखटायें और कानून जर अपना काम करेगा।
-राशिद अल्वी, कांग्रेस के प्रवक्ता
भाजपा का हमला
- कांग्रेस क्यों सीधे सीधे जांच करने के बजाय इस मामले में बचाव की मुद्रा में है? इससे तस्वीर और खराब ही हो रही है। हम इस मुद्दे में व्यापक जांच की मांग करते हैं। यह समय है कि कांग्रेस को जांच से भागने के बजाय ईमानदार और पारदर्शी जांच करना चाहिए।
- निर्मला सीतारमन, भाजपा प्रवक्ता
डीएलएफ का पक्ष
नई दिल्ली। अरविंद केजरीवाल द्वारा किए जा रहे हमले पर मंगलवार को डीएलएफ ने एक बार फिर देर रात अपना पक्ष रखा। कंपनी ने कहा कि समय की कमी के कारण वह विस्तार से नहीं कह पा रही है। डीएलएफ के अनुसार 30 एकड़ जमीन का मुद्दा अभी अदालत में है। जबकि वाड्रा की कंपनी में 50 फीसदी के शेयर होल्डिंग को स्वीकारते हुए उसने कहा कि इसमें उन्हें कोई फायदा या नुकसान नहीं हुआ था। इस मुद्दे का सेज से कोई संबंध नहीं था। डीएलएफ ने कहा कि उसने हरियाणा सरकार से कोई लाभ नहीं लिया है।
नीलामी में दी जमीन
अरविंद केजरीवाल के आरोपों हरियाणा के दो अफसरों एचएसआईआईडीसी के प्रबंध निदेशक राजीव अरोड़ा और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के महानिदेशक टीसी गुप्ता को को सिरे से खारिज कर दिया। अरोड़ा ने कहा कि 7 फरवरी, 2003 को 18 सुराखों का गोल्फ कोर्स, कन्वेंशन सुविधाएं, एंटरटेनमेंट, लेजर प्रोजेक्ट बनाने का फैसला हुआ था। 8 अगस्त, 2003 को जमीन का अधिग्रहण करने के लिए सेक्शन-4 की अधिसूचना जारी की थी। जनवरी, 2009 में स्कीम फ्लोट की गई। 30 अप्रैल, 2009 को केवल डीएलएफ की बोली प्राप्त हुई। इसे स्वीकार नहीं किया और कुछ शर्तों में बदलाव करते हुए दोबारा बोलियां मांगी गई।
तकनीकी बोली में 18 अगस्त, 2009 को दो कंपनियां कंट्री हाइट्स होल्डिंग्स और यूनीटेक बाहर हो गईं। अकेली डीएलएफ कंपनी बची। इसलिए 1700 करोड़ रुपये की रिजर्व प्राइस से 1703.16 करोड़ रुपये 350.72 एकड़ जमीन दे दिए। इसमें एचएसआईआईडीसी की 274.76 एकड़ और हुडा की 75.96 एकड़ जमीन है। इस जमीन में 38.47 एकड़ पर आवासीय, 19.24 एकड़ पर कामर्शियल, 20 एकड़ पर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स और 273 एकड़ पर गोल्फ कोर्स बनाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में पर्यावरण क्लीयरेंस से संबंधित मामला लंबित है। अगर सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिल गई तो यह जमीन डीएलएफ के पास चली जाएगी। अगर मंजूरी नहीं मिली तो जमीन एचएसआईआईडीसी और हुडा के पास रहेगी। जो पैसा डीएलएफ से मिला है उसे बिना ब्याज के लौटा दिया जाएगा।
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किसानों की अस्पताल बनाने के लिए ली गई 30 एकड़ जमीन डीएलएफ को एसईजेड यानी सेज (स्पेशल इकोनॉमिक जोन) बनाने के लिए दे दी गई। तब वाड्रा के इस कंपनी में 50 फीसदी शेयर थे। इतना ही नहीं इस कंपनी को जमीन देने के लिए टेंडर निकाले जाने के बाद शर्त बदलकर दो अन्य कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया।
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किसानों के साथ मीडिया से रू-ब-रू हुए केजरीवाल ने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार वाड्रा के लिए डीएलएफ की एजेंट के रूप में काम कर रही है। डीएलएफ को फायदा पहुंचाने के लिए सभी नियमों को ताक पर रखा गया। उन्होंने कहा कि डीएलएफ ने वाड्रा को ब्याज रहित 65 करोड़ रुपये नहीं, बल्कि 85 करोड़ रुपये का लोन दिया। वाड्रा की कंपनी ने रजिस्ट्रार के पास गलत बैलेंस शीट फाइल की।
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केजरीवाल ने हरियाणा सरकार से श्वेतपत्र जारी करने की मांग रखते हुए कहा कि वाड्रा के सहयोग से उसने डीएलएफ को कई फायदे पहुंचाए। श्वेतपत्र जारी करके हरियाणा सरकार बताए कि दस साल में सरकार ने इस कंपनी को क्या-क्या फायदे दिए। यह बात सामने आनी चाहिए कि आखिर कांग्रेस और वाड्रा के बीच क्या रिश्ते हैं? अगर सरकार के मंत्री बचाव में उतर रहे हैं तो इसकी क्या वजह है।
उन्होंने कहा कि वाड्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। केजरीवाल ने मांग की कि इस मामले की सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज से जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जितने सबूत पेश किए गए हैं वह आयकर की छापेमारी के लिए पर्याप्त हैं, लेकिन ऐसा अधिकारी नहीं करेंगे क्योंकि केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम आयकर रिटर्न ठीक भरे जाने की बात कह रहे हैं। क्या वह आयकर विभाग के अधिकारी हैं? या पेपर्स की स्क्रूटनी करते हैं?
उन्होंने बताया कि हरियाणा के मानेसर, वजीराबाद और गुड़गांव के किसानों ने सबूत दिए हैं। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने भी जमीन अधिग्रहण के मुद्दे पर कहा है कि डीएलएफ और हरियाणा सरकार के बीच साठगांठ है। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएलएफ एसईजेड कंपनी बनी तो रॉबर्ट वाड्रा इसके 50 फीसदी के शेयर होल्डर बन गए। बाद में उन्होंने डीएलएफ को यही शेयर वापस बेच दिए। आखिर एक वर्ष में क्या हुआ इसकी जांच होनी चाहिए? इसके पीछे कुछ न कुछ बात है। क्या हरियाणा सरकार की डीएलएफ पर मेहरबानी से इसकी कीमत चुकाई गई।
केजरीवाल का ‘पंच’
1 - गुड़गांव में 30 एकड़ जमीन अस्पताल के लिए थी। हरियाणा सरकार ने सेज के लिए डीएलफ को दी। लोग अदालत में गए। सेज हुआ रद्द।
2 - डीएलएफ के सेज में वाड्रा एक साल के लिए 50 फीसदी के शेयर होल्डर थे। साल भर बाद वाड्रा ने शेयर फिर डीएलएफ को बेच दिए।
3 - अंतरराष्ट्रीय स्तर की तमाम बोलियों को रद्द करते हुए हरियाणा सरकार ने जमीन डीएलएफ को दी।
4 - डीएलएफ की हित साधक कंपनियों ने मानेसर में किसानों से जमीन खरीदी। सरकार ने भूमि अधिग्रहण रद्द किया। अदालत ने इस पर स्टे दिया।
5 - 1700 करोड़ रुपये मूल्य की 350 एकड़ जमीन डीएलएफ को दी गई। किसानों को सरकार ने 20 लाख रुपये प्रति एकड़ दिए गए। डीएलएफ ने जमीन 5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से ली।
सरकार का तर्क
- हमने वाड्रा के साथ व्यवसाय करने वाली कंपनियों की जांच कराई है। हमारे रिकॉर्ड के मुताबिक प्राथमिक आधार पर हमें कोई अनियमितता नहीं लगती। जहां तक आगे के कदम का सवाल है, मुझे नहीं लगता कि कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति राह चलते किसी के आरोपों पर कार्रवाई करेगा।
- वीरप्पा मोइली, कंपनी मामलों के मंत्री
कांग्रेस का बचाव
केजरीवाल और उनके सहयोगी सिर्फ प्रचार पाने के लिये पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के परिवार के एक सदस्य पर रोज एक ही तरह के बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनके पास दस्तावेज हैं तो वह उन्हें मीडिया को दिखाने के बजाय कानून का दरवाजा खटखटायें और कानून जर अपना काम करेगा।
-राशिद अल्वी, कांग्रेस के प्रवक्ता
भाजपा का हमला
- कांग्रेस क्यों सीधे सीधे जांच करने के बजाय इस मामले में बचाव की मुद्रा में है? इससे तस्वीर और खराब ही हो रही है। हम इस मुद्दे में व्यापक जांच की मांग करते हैं। यह समय है कि कांग्रेस को जांच से भागने के बजाय ईमानदार और पारदर्शी जांच करना चाहिए।
- निर्मला सीतारमन, भाजपा प्रवक्ता
डीएलएफ का पक्ष
नई दिल्ली। अरविंद केजरीवाल द्वारा किए जा रहे हमले पर मंगलवार को डीएलएफ ने एक बार फिर देर रात अपना पक्ष रखा। कंपनी ने कहा कि समय की कमी के कारण वह विस्तार से नहीं कह पा रही है। डीएलएफ के अनुसार 30 एकड़ जमीन का मुद्दा अभी अदालत में है। जबकि वाड्रा की कंपनी में 50 फीसदी के शेयर होल्डिंग को स्वीकारते हुए उसने कहा कि इसमें उन्हें कोई फायदा या नुकसान नहीं हुआ था। इस मुद्दे का सेज से कोई संबंध नहीं था। डीएलएफ ने कहा कि उसने हरियाणा सरकार से कोई लाभ नहीं लिया है।
नीलामी में दी जमीन
अरविंद केजरीवाल के आरोपों हरियाणा के दो अफसरों एचएसआईआईडीसी के प्रबंध निदेशक राजीव अरोड़ा और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के महानिदेशक टीसी गुप्ता को को सिरे से खारिज कर दिया। अरोड़ा ने कहा कि 7 फरवरी, 2003 को 18 सुराखों का गोल्फ कोर्स, कन्वेंशन सुविधाएं, एंटरटेनमेंट, लेजर प्रोजेक्ट बनाने का फैसला हुआ था। 8 अगस्त, 2003 को जमीन का अधिग्रहण करने के लिए सेक्शन-4 की अधिसूचना जारी की थी। जनवरी, 2009 में स्कीम फ्लोट की गई। 30 अप्रैल, 2009 को केवल डीएलएफ की बोली प्राप्त हुई। इसे स्वीकार नहीं किया और कुछ शर्तों में बदलाव करते हुए दोबारा बोलियां मांगी गई।
तकनीकी बोली में 18 अगस्त, 2009 को दो कंपनियां कंट्री हाइट्स होल्डिंग्स और यूनीटेक बाहर हो गईं। अकेली डीएलएफ कंपनी बची। इसलिए 1700 करोड़ रुपये की रिजर्व प्राइस से 1703.16 करोड़ रुपये 350.72 एकड़ जमीन दे दिए। इसमें एचएसआईआईडीसी की 274.76 एकड़ और हुडा की 75.96 एकड़ जमीन है। इस जमीन में 38.47 एकड़ पर आवासीय, 19.24 एकड़ पर कामर्शियल, 20 एकड़ पर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स और 273 एकड़ पर गोल्फ कोर्स बनाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में पर्यावरण क्लीयरेंस से संबंधित मामला लंबित है। अगर सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिल गई तो यह जमीन डीएलएफ के पास चली जाएगी। अगर मंजूरी नहीं मिली तो जमीन एचएसआईआईडीसी और हुडा के पास रहेगी। जो पैसा डीएलएफ से मिला है उसे बिना ब्याज के लौटा दिया जाएगा।