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खतरनाक चोटी पर तिरंगा फहराएगा यह छोटू, जानिए इसके बारे में

Thu, 29 Jan 2015 12:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Thu, 29 Jan 2015 12:25 PM IST
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harshit saumitra plan to climb on kilimanjaro.

महज छह साल की उम्र में माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप (5550 मीटर ऊंची) पहुंचकर विश्व कीर्तिमान स्थापित करने वाले हर्षित सौमित्र अब दक्षिण अफ्रीका की सबसे ऊंचे पहाड़ किलिमंजारो को लांघने की तैयारी में जुट गए हैं।

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तंजानिया की 5895 मीटर ऊंची चोटी पर भारतीय तिरंगा फहराने की तैयारियों के बीच दुनिया के सबसे कम उम्र के पर्वतारोही ने यहां अमर उजाला से ‘मिशन एवरेस्ट’ का अपना अनुभव साझा किया। हर्षित ने कहा कि अन्य पर्वतारोहियों की तरह उनका सपना भी माउंट एवरेस्ट की चोटी को फतह करना है।
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मूलत: दरभंगा बिहार के रहने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही राजीव सौमित्र के पुत्र हर्षित ने पिछले 18 अक्तूबर को माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप पहुंचने का कीर्तिमान स्थापित किया था। वह अपने पिता के साथ गणतंत्र दिवस पर एक समारोह में शिरकत करने वाराणसी आए थे। राजीव सौमित्र की दिल्ली में संचालित होने वाली पैरामाउंट कोचिंग की एक शाखा यहां दुर्गाकुंड में भी है।
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'दर्द को सहते हुए मैं आगे चलता गया'

harshit saumitra plan to climb on kilimanjaro.

बकौल हर्षित, ‘बीते साल सात अक्तूबर को लुकला (नेपाल) से मैं मिशन एवरेस्ट पर निकला था। 17 अक्तूबर में मैं माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप पर था। अगले दिन काला पत्थर चोटी पर तिरंगा फहराने के बाद मैं लौटा। इसी के साथ ही 5550 मीटर ऊंची चोटी पर पहुंचने वाला दुनिया का मैं सबसे कम उम्र का पर्वतारोही बन गया। हालांकि मेरा सपना 8848 मीटर ऊंची माउंट एवरेस्ट की चोटी को फतह करना है।’

हर्षित ने बताया कि ‘बेस कैंप से चंद मीटर दूर था जब मेरा सिर दर्द करने लगा। पापा ने मुझे परेशान देखा तो पूछा मगर मैंने झूठ बोल दिया कि कोई दिक्कत नहीं क्योंकि मैं जानता था कि सच बोल दूंगा तो मेरा मिशन यहीं खत्म हो जाएगा और कोई मुझे एक कदम भी आगे जाने नहीं देगा। मगर अपने दर्द को सहते हुए मैं आगे चलता गया और चंद घंटे बाद मैं वहां पहुंच गया जहां मेरी उम्र का आज तक कोई नहीं पहुंचा था।

पूरे अभियान में हर्षित के साथ साये की तरह रहे उनके पर्वतारोही पिता राजीव सौमित्र ने बताया कि डॉक्टरों ने हर्षित को इतनी ऊंची चोटी पर चढ़ने की इजाजत नहीं दी थी मगर हर्षित ने अपने छोटे कदमों से बड़ा कारनामा कर दिखाया। काला पत्थर के बाद अब उसकी तैयारी तंजानिया की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो को लांघने की है। 5895 मीटर ऊंची इस चोटी पर चढ़ाई बेहद खतरनाक है मगर मेरा पूरा विश्वास है कि हर्षित चोटी पर तिरंगा फहराएगा। बताया कि हर्षित ने हिमाचल प्रदेश के रोहतांग पास में ‘मिशन एवरेस्ट’ की तैयारी की थी।

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