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यूपी से एमपी तक ले जाएंगे हार्दिक आरक्षण की आग

Mon, 31 Aug 2015 08:31 AM IST
Updated Mon, 31 Aug 2015 08:31 AM IST
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hardik patel confused about reservation

पटेलों को आरक्षण देने की मांग बुलंद कर अचानक देश भर में चर्चा में आए हार्दिक पटेल आरक्षण के सवाल पर भ्रमित नजर आए। गुजरात में शक्ति प्रदर्शन कर राष्ट्रीय मीडिया से रूबरू होने यहां आए पटेल एक तरफ अपनी बिरादरी के लिए आरक्षण की मांग की तो दूसरी ओर आरक्षण को देश के विकास में बाधक भी करार दिया।

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उन्होंने आरक्षण की मांग कर रही अन्य जातियों के साथ मिल कर राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जल्द ही वह लखनऊ में कुर्मियों को आरक्षण के समर्थन में तो मध्यप्रदेश में गुर्जरों को आरक्षण के समर्थन रैली का आयोजन करेंगे। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के विकास मॉडल पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।
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हालांकि लगे हाथ यह भी कहा कि देश की सुरक्षा पर पीएम मोदी का भाषण उन्हें अच्छा लगता है। उन्होंने अपनी मुहिम में कई जातियों के समर्थन का दावा किया। इस क्रम में गुर्जर और कुर्मी नेताओं के साथ बैठक कर रणनीति भी तैयार की। मगर खुद को पटेलों की तरह ही पिछड़ी जाति में शामिल करने की मांग कर रहे जाट नेताओं ने अपना संदेह जाहिर करते हुए उनसे दूरी बना ली।
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जाट आरक्षण संघर्ष समिति के मुखिया यशपाल मलिक ने हार्दिक की मुहिम पर संदेह जाहिर किया और कहा कि जब तक समिति का भ्रम दूर नहीं होगा, तब तक वह हार्दिक के साथ मिल कर आंदोलन नहीं करेगी।

प्रेस क्लब में मीडिया से रूबरू हार्दिक पटेल ने पूरे देश में आरक्षण आंदोलन की मुहिम छेड़ने की घोषणा की है। उन्होंने आरक्षण की मांग कर रही कई जातियों को गोलबंद करने का दावा करते हुए कहा कि जल्द ही लखनऊ और भोपाल में अन्य जातियों के साथ बड़ी रैलियों का आयोजन किया जाएगा।

आरक्षण देश के विकास में एक बड़ी बाधा

hardik patel confused about reservation

इस दौरान उन्होंने कहा कि पटेल बिरादरी के ज्यादातर युवा बेरोजगार हैं। किसान बड़ी संख्या में आत्महत्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अपना हक हासिल करने के लिए वह 27 करोड़ पटेलों और अन्य जातियों को गोलबंद कर जल्द ही देशव्यापी मुहिम शुरू करेंगे।

हालांकि इस दौरान एक सवाल के जवाब में उन्होंने माना कि आरक्षण देश के विकास में एक बड़ी बाधा है। उन्होंने कहा कि आरक्षण की व्यवस्था महज 10 साल के लिए की गई थी, लेकिन आजादी के करीब 7 दशक बीत जाने के बाद भी इसे जारी रखा गया है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले अहमदाबाद में आयोजित रैली में हार्दिक ने कहा था कि या तो पटेलों को भी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए या फिर आरक्षण की व्यवस्था को ही खत्म कर देना चाहिए।

हार्दिक ने किसी दल से अपनी नजदीकी से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि विहिप नेता प्रवीण तोगड़िया से ही नहीं उनकी भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे पुरुषोत्तम रुपाला से भी पहचान रही है। इस बीच अपनी मुहिम को विस्तार देने की रणनीति बनाने के लिए पटेल ने कोटला भवन में गुर्जर और कुर्मी नेताओं के साथ बैठक की। इस बैठक में 1 अगस्त को भोपाल में बड़ी रैली का फैसला हुआ। हालांकि जाट नेताओं ने उनसे दूरी बना ली।

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