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'लड़कियों की शादी की उम्र तय करना मुश्किल'

Thu, 25 Jul 2013 02:32 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 25 Jul 2013 02:32 PM IST
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hard to fix marriage age for girls

राष्ट्रीय महिला आयोग की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने लड़कियों की शादी की उम्र तय करने में असर्मथता जाहिर की। बुधवार को कोर्ट ने एक याचिका पर ये फैसला सुनाया।

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महिला आयोग ने अपनी याचिका में आठ साल पहले के हाइकोर्ट के दो फैसलों पर रोक लगाने और पूरे देश में लड़कियों की शादी की उम्र के कानून में समानता लाने की मांग की थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग लड़कियों की शादी को मंजूरी देने के हाइकोर्ट के दोनों फैसलों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

अपने फैसलों में दिल्ली हाइकोर्ट ने अक्टूबर, 2005 और आंध्र हाइकोर्ट ने फरवरी, 2006 में दो नाबालिग लड़कियों को अपने प्रेमियों से शादी को मंजूरी दे दी थी।
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अदालत का कहना था कि वे दोनों अपने प्रेमियों के साथ अपनी मर्जी से गई हैं। लड़कों पर अपहरण का आरोप भी खारिज कर दिया गया था। इस फैसले पर महिला आयोग ने आपत्ति जताई थी।

बाल विवाह को मिलेगा बढ़ावा
महिला आयोग का कहना है कि इस फैसले से लड़कियों की शादी की उम्र के कानून में विरोधाभास पैदा होगा और बाल विवाह को भी बढ़ावा मिलेगा। महिला आयोग ने शादी की उम्र के कानून में समानता लाने की मांग की थी।

न्यायाधीश जे एस खेहर और दीपक मिश्रा की बेंच ने कहा कि इन दोनों मामलों में लड़कियों से कोई जबरदस्ती नहीं की गई थी। अब वे दोनों लड़कियां बालिग भी हो चुकी हैं।


साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा की लड़कियों की शादी की उम्र का कोई फॉर्मूला निकालना मुश्किल है। हम कैसे कह सकते हैं की सभी मामलों में एक ही फॉर्मूला चल सकता है। कानून में समानत लाने के लिए महिला आयोग को उपयुक्त प्राधिकरण के पास जाना चाहिए।

आठ दिनों में मांगी रिपोर्ट
हालांकि महिला आयोग की बात पर गौर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने लड़कियों की शादी की उम्र में समानता लाने के लिए दायर याचिका को स्वीकार कर लिया।

इसके लिए कोर्ट ने महिला आयोग और अतिरिक्त महाधिवक्ता इंदिरा जय सिंह को इस संबंध में रिपोर्ट तैयार कर आठ दिनों में कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया।

साथ ही आयोग को मजबूरी या धोखे से की गई कम उम्र की शादियों के संबंध में विरोध जारी रखने के लिए कहा।

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