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हिंदुस्तान बोला, गैंगरेप के दोषियों को फांसी दो
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Mon, 31 Dec 2012 10:40 AM IST
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सिंगापुर से गैंगरेप पीड़िता के पार्थिव शरीर के दिल्ली आने के चंद घंटे बाद ही रविवार को उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। इसके बाद पूरा देश सड़कों पर उतर आया। मुंबई में बॉलीवुड सड़कों पर उतर गया तो चेन्नई, त्रिवेंद्रम, बंगलूरू, पणजी समेत विभिन्न शहरों में अलग-अलग तरीके से लोगों ने अपना गुस्सा जाहिर किया। कइयों ने सड़क पर मोमबत्ती जलाकर तो किसी ने रेत पर पीड़ित महिला की आकृति बनाकर अपनी संवेदना व्यक्त की।
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सुबह घने कोहरे के बीच अंतिम संस्कार कर और फिर नई दिल्ली क्षेत्र की नाकेबंदी कर सरकार ने लोगों को सड़क पर उतरने से रोकने की तमाम कोशिश की, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। क्या दिल्ली, क्या मुंबई और क्या चेन्नई, क्या कोलकाता, हर शहर और हर गांव से बस एक ही आवाज उठी कि दोषियों को फांसी दो। जनता के गुस्से का दबाव ही था कि तड़के साढ़े तीन बजे जब पीड़िता का पार्थिव शरीर हवाई अड्डे पहुंचा तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह वहां मौजूद थे।
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देश का गुस्सा सातवें आसमान पर है। दोषियों को फांसी से कम की सजा जनता मानने के लिए तैयार नहीं है। पीड़िता की मौत के बाद जनता के गुस्से का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत-पाकिस्तान मैच का रोमांच भी उनका ध्यान हटा नहीं सका। युवा और बुजुर्ग हर कोई सड़क पर नारे लगाता दिखा। टीवी चैनलों पर लोगों के आक्रोश का सीधा प्रसारण किया जा रहा है।
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हैरानी की बात तो यह है कि देशभर में धरना-प्रदर्शन में सिर्फ और सिर्फ जनता सामने दिखी, नेता तो रविवार को सड़कों पर उतरने का साहस भी नहीं दिखा पाए। शनिवार को जंतर-मंतर पर शीला दीक्षित के साथ लोगों के बर्ताव को देखते हुए देशभर में कोई नेता रविवार को जनता के गुस्से में भागीदार बनने की हिम्मत नहीं दिखा सका। ज्यादातर नेता टीवी चैनलों पर ही अपनी आवाज बुलंद करते दिखे।