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आधी आबादी को जरूरत है एक और ‘आजादी’ की
नई दिल्ली/बृजेश सिंह
Updated Fri, 08 Mar 2013 08:22 AM IST
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आज आधी आबादी का अपना दिन है। लेकिन महिलाओं के विकास और सशक्तीकरण का हर साल गवाह बनते रहे अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर यदि हम देश में महिलाओं के हालात का जायजा लेते हैं तो सारे दावे बेमानी नजर आते हैं। महिलाओं को सिर्फ हिंसा और जुल्मों का सामना ही नहीं करना पड़ता, बल्कि इस पुरुष प्रधान समाज में आज भी उनकी स्थित बेहतर नहीं है।
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देश में महिलाओं की कुल संख्या आबादी के आधे से थोड़ा ही कम है लेकिन भागीदारी के मामले में वे बहुत पीछे हैं। आज संगठित क्षेत्र में 19 फीसदी तथा सार्वजनिक क्षेत्र में 17 फीसदी महिलाएं काम करती हैं।
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देश को चलाने तथा फैसले लेने के लिहाज से इनकी भागीदारी और भी कम है। आईएएस संवर्ग में लगभग 12 फीसदी तथा आईपीएस में पांच फीसदी ही महिलाएं हैं। राजनीति के क्षेत्र में जहां महिलाओं के कल्याण को लेकर भारी भरकम दावे किए जाते हैं वहां भी स्थिति अच्छी नहीं है।
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संसद के दोनों सदनों में केवल 10 फीसदी महिला सदस्य हैं, जबकि राज्यों की विधानसभाओं में यह आंकड़ा छह फीसदी से भी कम है।
पंचायती राज व्यवस्था में आरक्षण के चलते 33 फीसदी महिलाओं की भागीदारी होने लगी है। लेकिन अब भी तमाम महिलाओं के पति व पिता उन्हें मोहरा बनाकर फैसले लेने के अधिकार अपने पास ही रखे हुए हैं। यह तस्वीर जल्द बदलेगी, फिलहाल ऐसी कोई उम्मीद भी नहीं दिखती।
भारत में महिलाओं की उपलब्धियों को बखान करने वाले अक्सर इंदिरा गांधी से लेकर, लता मंगेशकर, पीटी उषा, कल्पना चावला, ममता व मायावती तक के नाम गिना देते हैं। लेकिन इनकी उपलब्धियां महिलाओं की दशा से ज्यादा इनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों और अवसर तक सीमित हैं।
आम महिलाओं की दशा इनसे बहुत अलग है। ऐसे में जब तक महिलाओं को इस समाज में बराबरी का हक पाने की नई आजादी नहीं मिल जाती, तब तक दूसरे प्रयास भी बेमानी ही रहेंगे। इसे हासिल करने के लिए किसी और से उम्मीद न करके महिलाओं को खुद आगे आना होगा।
असुरक्षित दिल्ली
दिल्ली में महिलाओं पर जुल्म तेजी से बढ़े हैं। देश की राजधानी में इस साल 1 जनवरी से लेकर 15 फरवरी तक दुष्कर्म के 181 मामले सामने आए हैं। इस तरह यहां रोजाना औसतन चार महिलाएं दुष्कर्म की शिकार हो रही हैं। जबकि 2012 में दिल्ली में यह औसत दो पर था। 2012 में पूरे साल में दुष्कर्म के कुल 706 मामले दर्ज हुए थे।
महिला दिवस: कैसे हुई शुरुआत
--1908 में न्यूयॉर्क में 15 हजार कामगार महिलाओं ने अपनी बेहतरी के लिए प्रदर्शन किया।
--1909 में अमेरिका की ही सोशलिस्ट पार्टी ने पहली बार नेशनल वुमन-डे मनाया।
--1913 में महिला दिवस की तारीख 8 मार्च कर दी गई।
--1975 को पहला अंतरराष्ट्रीय महिला वर्ष मनाया गया
--1977 में संयुक्त राष्ट्र ने 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस घोषित किया।
देश में महिलाओं की स्थिति और प्रतिनिधित्व
- महिलाओं की संख्या - 58.64 करोड़
- साक्षर महिलाएं -33.42 करोड़
- पंचायत- 28.18 लाख
- लोकसभा- 10.8 फीसदी
- राज्यसभा- 10.3 फीसदी
- विभिन्न कंपनियों में सीईओ- 11 फीसदी
पड़ोसी मुल्कों में स्थिति
- पाकिस्तान की संसद में महिलाएं- 30 फीसदी
- बांग्लादेश की संसद में महिलाएं-15 फीसदी
आस-पड़ोस में बदतर हैं हालात
- भारत में दहेज का दानव हर दिन 22 महिलाओं को लील जाता है।
- पाकिस्तान में प्रति वर्ष 450 से ज्यादा लड़कियां और महिलाएं ऑनर किलिंग का शिकार होती हैं।
- बांग्लादेश में हर हफ्ते 10 महिलाएं तेजाब हमले का शिकार होती हैं।
- नेपाल में 77 फीसदी महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं।
- श्रीलंका में यौन उत्पीड़न के मामलों में 78 फीसदी 16 वर्ष से कम उम्र की लड़कियां होती हैं।
मुस्कुराओ जरा
देश की इंटरनेट आबादी में 40 फीसदी यूजर्स महिलाएं हैं। (एसोचैम और कॉमस्कोर सर्वे)
जहां महिला होना फख्र की बात है
एक महिला होने के नाते सबसे बेहतर देश- आइसलैंड
- रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और राजनीति में महिलाओं की स्थिति और भागीदारी सबसे बेहतर
यहां मां बनना सबसे बेहतर- नार्वे
- यहां मातृ मृत्यु दर 7600 में से एक है
यहां राजनेता होना सबसे बेहतर- रवांडा
- यहां की संसद में 80 में से 45 सीटों पर महिलाओं का कब्जा
देश को दे रहीं दिशा- श्रीलंका
- श्रीलंका में बीते 23 सालों से महिलाएं ही देश की सत्ता पर काबिज हैं
अधिकार चुनने के लिहाज से सबसे बेहतर- स्वीडन
-परिवार बढ़ाने और गर्भपात जैसे गंभीर मामलों पर महिलाएं बिना किसी दबाव के निर्णय ले सकती हैं।
जहां महिला बॉस होना अच्छा- थाईलैंड
- यहां की कंपनियों में उच्च पदों पर 45 फीसदी महिलाओं का दबदबा
जहां खूब जीती हैं महिलाएं- जापान
- जापान की महिलाओं का औसत जीवन काल 87 वर्ष है। ( द इंडिपेंडेंट-2012 का सर्वे)
महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित देश
रैंक - देश
1. कनाडा
2. जर्मनी
3. ब्रिटेन
4. ऑस्ट्रेलिया
5. फ्रांस
महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देश
रैंक - देश
19- भारत
18- सऊदी अरब
17- इंडोनेशिया
16- दक्षिण अफ्रीका
15 -मैक्सिको
(जी-20 देशों पर टीआरएफ का सर्वे)