गुलजार ने कहा मुझे उनसे मिलकर अच्छा लगेगा जिन्हें 'रामराज्य' मिल गया
साहित्यकारों की हत्या और नोएडा के दादरी काण्ड के विरोध में साहित्यकारों का विरोध थमता नहीं दिख रहा है। इसी क्रम में प्रसिद्ध गीतकार गुलजार ने भी अपना विरोध व्यक्त किया है।
उन्होंने कहा कि जो पुरस्कार लौटाए जा रहे हैं वो अकादमी के अवार्ड्स थे उनको रिटर्न करना प्रतीकात्मक विरोध था। गुलजार ने कहा कि पहले ऐसा माहौल नहीं था कि नाम से पहले धर्म पूंछा जाए।
उन्होंने कहा कि मुझे उनसे मिल कर अच्छा लगेगा जिनको 'राम राज्य' मिल गया है। उन्होंने साहित्यकारों की हत्या पर कहा कि 'जिस तरह से हत्या हुई, उसमें साहित्य अकदामी का कोई दोष नहीं है, वो सरकार में से निकल हुआ दोष है।'
ऐसा कभी नहीं सोचा था
गुलजार ने देश के माहौल की चर्चा करते हुए कहा कि ऐसा माहौल पहले हमने कभी
नहीं देखा था, कम से कम बात करने के लिए बेखौफ थे।
उन्होंने कहा कि इस तरह
का कभी नहीं सोचा था कि नाम पूछने से पहले धर्म पूछना पड़ जाए, ये तो कभी
नहीं हुआ था।
गुलजार ने कहा कि लेखक बेचारा क्या राजनीति करेगा, वो तो बस
दिल की बात कहता है, जमीर की बात कर रहा है और वो समाज का जमीर संभालने
वाले लोग हैं