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कलाकारों को राजनीति से दूर रहना चाहिए: गुलाम अली

Tue, 12 Jan 2016 07:27 PM IST
Updated Tue, 12 Jan 2016 07:27 PM IST
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gulam ali say far away from politics

मशहूर पाकिस्तानी गजल गायक गुलाम अली ने कहा कि कलाकारों को राजनीति से दूर रहना चाहिए। पड़ोसी देशों में अमन की आश को जीवित रखना उनकी जिम्मेदारी है। राजनीति करने वाले कभी महान कलाकार नहीं हो सकते।

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मुंबई में शिवसेना की धमकी के चलते कार्यक्रम रद्द होने के बाद इस गजल गायक ने दोबारा भारत की धरती पर कदम नहीं रखने की कसम खाई थी। लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बुलावे पर वह न सिर्फ कोलकाता आए, बल्कि यहां नेताजी इंडोर स्टेडियम में अपनी गजलों से श्रोताओं का दिल भी जीत लिया।
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कार्यक्रम से पहले यहां एक अनौपचारिक बातचीत में गुलाम अली ने बताया कि उनकी गजल ‘चुपके-चुपके रात दिन’ बीआर चोपड़ा की फिल्म ‘निकाह’ में कैसे गाई गई थी। उन्होंने इस गजल को लाहौर में रेडियो पाकिस्तान के लिए गाया था। तब उनको पता नहीं था कि यह इतनी मशहूर हो जाएगी।
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बाद में एचएमवी उसका रिकार्ड तैयार किया। इसके बाद ही चोपड़ा व सलमा आगा ने उनको फोन किया। वे चाहते थे कि अली भारत आकर उनकी फिल्म के लिए एक गाना रिकार्ड करें। अली बताते हैं कि उस समय भारत आने के लिए एनओसी की जरूरत पड़ती थी। इसके अलावा वह तब अमेरिका के दौरे पर थे। उन्होंने चोपड़ा से कहा, ‘वह मेरे रिकार्ड से इस गजल का इस्तेमाल कर लें। मैं बाद में आकर फिल्म के लिए इसे रिकार्ड कर दूंगा।’

'फिल्मों के लिए गाना नहीं रही प्राथमिकता'

gulam ali say far away from politics

वैसे फिल्मों में गाना इस महान गायक के लिए कभी प्राथमिकता नहीं रही है। उनका कहना है, ‘फिल्म वाले मुझसे अपनी जरूरत के मुताबिक गाने को कहते हैं। मैंने भारतीय के अलावा पाकिस्तानी फिल्मों में भी गाया है। जब मेरे पास समय होता है, तभी फिल्मों के लिए गाता हूं।’

गुलाम अली ने कहा, ‘अब फिल्मों में संगीत का स्वरूप पहले के मुकाबले बदल गया है। पहले नौशाद व मदन मोहन जैसे संगीत निर्देशक थे। इनके अलावा सलिल चौधरी और मन्ना दे के साथ भी मेरी काफी बनती थी। अब तेज संगीत और जींस का जमाना है, लेकिन मैंने आज तक कभी जींस नहीं पहनी है।’

पहली बार साथ में आया बेटा
गुलाम अली के साथ उनके पुत्र आमिक अली का यह पहला कोलकाता दौरा है। अली कहते हैं कि कोलकाता के लोग संगीत के पारखी हैं। ऐसे श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुति देने का रोमांच ही अलग है। सबसे पसंदीदा गजल के सवाल पर उनका कहना था कि तमाम गजलें उनके बच्चों की तरह हैं। लोग जब किसी गजल को पसंद करने लगते हैं, तो वह उनकी प्रिय बन जाती है।

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