गुजरात पुलिस का दंगाई बर्ताव सीसीटीवी में कैद, देखें वीडियो
पटेल समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर मंगलवार को रैली के दौरान भड़की हिंसा के वक्त पुलिसकर्मियों के कारों के शीशे तोड़ने के सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद गुजरात पुलिस सवालों में घिर गई है।
हाईकोर्ट ने अहमदाबाद के पुलिस आयुक्त को इसकी जांच करने और दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। आंदोलन के दौरान दहशत फैलाने के लिए पुलिसकर्मियों पर हवाई फायरिंग और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप है।
हाईकोर्ट ने पूछा कि सीसीटीवी फुटेज में पुलिसकर्मियों के संपत्तियों को नुकसान पहुंचाते हुए देखा जा रहा है। अगर पुलिस ऐसा करती है.... तो दंगाइयों और रक्षकों में क्या अंतर रह जाएगा। स्थानीय वकील विराट पोपट और तीरथ दवे ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर 25 अगस्त को करीब 40 पुलिसकर्मियों के उनकी हाउसिंग सोसायटी में घुसकर वाहनों में तोड़फोड़ करने और बेवजह आंसू गैस के गोले दागने का आरोप लगाया है।
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हार्दिक पटेल ने मांगा 35-35 लाख
पटेल आरक्षण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने हिंसा में मारे गए समुदाय के प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों को 35-35 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही आंदोलन को तेज करते हुए हार्दिक ने अपने समुदाय के किसानों से कहा है कि वे सब्जी और दूध जैसी जरूरी चीजें शहरों में न भेजें।
उन्होंने मांग की है कि पटेल ने राज्य सरकार से मांग की कि वह जनता पर जुर्म करने वाले पुलिसकर्मियों को निलंबित करे और इस आंदोलन में शहीद हुए युवाओं के परिजनों को 35-35 लाख रुपये मुआवजा दे।
विधानसभा में हंगामा कांग्रेस विधायक निलंबित: पटेल समुदाय के आंदोलन के दौरान हिंसा को लेकर राज्य विधानसभा में गुरुवार को हुए भारी हंगामे के बीच विपक्ष के नेता शंकर सिंह वाघेला को छोड़कर कांग्रेस के सभी विधायकों को दिनभर के लिए निलंबित कर दिया गया।
विधानसभा अध्यक्ष गणपत वासवा ने सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे कांग्रेस विधायकों को निलंबित कर दिया। निलंबन के बाद भी विधायक वेल में पहुंचकर विरोध करते रहे।
काबू में हालात, कई इलाकों से कर्फ्यू हटा
पटेल आरक्षण की मांग को लेकर हिंसा की आग में दो दिनों तक जलने के बाद गुरुवार को गुजरात के प्रमुख शहरों में स्थिति नियंत्रण में रही। इस बीच बुधवार की हिंसा में घायल एक युवक के दम तोड़ देने से मरने वालों की संख्या 10 हो गई है। कम से कम आठ जगहों पर रेल पटरियां उखाड़े जाने के कारण अहमदाबाद-दिल्ली राजधानी सहित कम के कम 55 ट्रेनें गुरुवार को भी रद्द रहीं।
राज्य में बिगड़े हालात पर काबू पाने के लिए बुधवार को बुलाई गई सेना ने गुरुवार को भी अहमदाबाद में फ्लैग मार्च किया। हिंसा से बुरी तरह प्रभावित सूरत और मेहसाणा में भी सेना की तैनाती की गई है।
अहमदाबाद के जिलाधिकारी राजकुमार बेनिवाल ने कहा कि गुरुवार को पूरे शहर में कही से कोई अप्रिय घटना की रिपोर्ट नहीं आई। हालांकि निजी व सरकारी स्कूल, व्यापारिक प्रतिष्ठान, शॉपिंग काम्प्लेक्स और दुकानें बंद रहीं। सड़कों पर आवाजाही सामान्य रही।
अहमदाबाद में हुई सबसे ज्यादा मौतें
जिलाधिकारी ने बताया कि हिंसा से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में सेना की पांच कंपनियों ने फ्लैग मार्च किया। उधर, सूरत की स्थिति में भी सुधार है। पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना ने बताया कि सुबह आठ बजे से कर्फ्यू हटा दिया गया।
दुकानें व व्यापारिक प्रतिष्ठान खुले और जनजीवन पटरी पर लौट गई। इस बीच हिंसा के दौरान घायल अहमदाबाद सिटी के मनीष वलाडिया ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
अहमदाबाद में सबसे अधिक पांच लोगों की मौत हुई थी जबकि सूरत और पाटन में एक-एक व्यक्ति मौत हुई। बनासकांठा में तीन लोगों की मौत हुई थी। राजकोट और पाटन जिले से भी कर्फ्यू हटा दिया गया। वहां की स्थिति सामान्य हो रही है।