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डॉन बबलू को लेकर अखिलेश सरकार पर गंभीर आरोप
पीयूष पांडेय/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 23 Aug 2014 01:12 PM IST
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उत्तर प्रदेश की जेल में बंद माफिया सरगना बबलू श्रीवास्तव कारागार से ही आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देता है। यूपी जेल प्रशासन की ओर से उसे सारी सुविधाएं मुहैया करायी जाती हैं और उसकी खतरनाक साजिशों को अंजाम देने में सहायता की जाती है।
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गुजरात सरकार ने सर्वोच्च अदालत में शुक्रवार को यह दावा किया। भाजपा शासित राज्य सरकार ने कहा है कि बरेली जेल बबलू के लिए स्वर्ग है, जो कैद में रहते हुए जघन्य अपराधों को जेल प्रशासन की सहायता से अंजाम देता है।
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जस्टिस गोपाल गौड़ा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष गुजरात सरकार ने हलफनामा दाखिल कर दावा किया कि बबलू ने जेल के भीतर से तमाम आपराधिक साजिशों को मोबाइल फोन के जरिए अंजाम दिया है।
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बबलू मौजूदा समय बरेली सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है। वह 1993 के डिप्टी कलेक्टर एलडी अरोड़ा के सनसनीखेज हत्याकांड समेत अन्य मामलों में सजा काट रहा है। उसे सूरत की निचली अदालत ने हत्या के प्रयास के एक मामले में 25 अगस्त को पेश होने को कहा था।
गुजरात के एडीशनल सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता और हेमंतिका वाही ने पीठ के समक्ष आरोप लगाया कि यूपी जेल प्रशासन सूरत की अदालत में पेश होने से बचने में बबलू की सहायता कर रहा है।
बबलू वहां पेश होने पर आपत्ति जता रहा है, क्योंकि गुजरात से वह अपनी साजिशों को अंजाम नहीं दे पाएगा और जो सुविधाएं उसे बरेली जेल में मिल रहा है, वह भी नहीं मिलेंगी।
सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना
सरगना बबलू ने सूरत की अदालत की ओर से उसे पेश करने के वारंट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। जो मार्च, 2014 में एक व्यक्ति की हत्या के प्रयास के मामले में उसके खिलाफ जारी हुआ है। हालांकि वह इससे पहले से जेल में बंद है।
दरअसल इस मामले के सह अभियुक्त ने पुलिस को बताया है कि बबलू के कहने पर उसने अमजद फजल दलाल को मारने की कोशिश की। हालांकि बबलू इस मामले में अपनी भूमिका से इनकार कर रहा है और यह दावा कर रहा है कि गुजरात में उसकी जान को खतरा है, उसे दाऊद के गुर्गे मार देंगे।
बबलू के अधिवक्ता केटीएस तुलसी ने सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले का हवाला देते हुए कहा कि गुजरात में लोग फर्जी मुठभेड़ में मार दिए जाते हैं।
ऐसे में मेरे मुवक्किल सूरत की अदालत में नहीं पेश हो रहे। तुलसी ने कहा कि वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए उनके मुवक्किल से पूछताछ की जा सकती है।
गुजरात के अधिवक्ता ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि बबलू से हिरासत में पूछताछ किया जाना जरूरी है। उन्हें गुजरात में पूरी सुरक्षा मुहैया करायी जाएगी। यदि वह यूपी पुलिस के साथ गुजरात आना चाहते हैं तो शीर्षस्थ अदालत यह तय कर सकती है।
हालांकि यूपी के अधिवक्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से सुरक्षा मुहैया कराए जाने की जरूरत नहीं है। यदि गुजरात पुलिस यह आश्वासन देती है कि 21 पुलिस अधिकारी सुरक्षा में तैनात किए जाएंगे।
दरअसल इस मामले के सह अभियुक्त ने पुलिस को बताया है कि बबलू के कहने पर उसने अमजद फजल दलाल को मारने की कोशिश की। हालांकि बबलू इस मामले में अपनी भूमिका से इनकार कर रहा है और यह दावा कर रहा है कि गुजरात में उसकी जान को खतरा है, उसे दाऊद के गुर्गे मार देंगे।
बबलू के अधिवक्ता केटीएस तुलसी ने सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले का हवाला देते हुए कहा कि गुजरात में लोग फर्जी मुठभेड़ में मार दिए जाते हैं।
ऐसे में मेरे मुवक्किल सूरत की अदालत में नहीं पेश हो रहे। तुलसी ने कहा कि वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए उनके मुवक्किल से पूछताछ की जा सकती है।
गुजरात के अधिवक्ता ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि बबलू से हिरासत में पूछताछ किया जाना जरूरी है। उन्हें गुजरात में पूरी सुरक्षा मुहैया करायी जाएगी। यदि वह यूपी पुलिस के साथ गुजरात आना चाहते हैं तो शीर्षस्थ अदालत यह तय कर सकती है।
हालांकि यूपी के अधिवक्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से सुरक्षा मुहैया कराए जाने की जरूरत नहीं है। यदि गुजरात पुलिस यह आश्वासन देती है कि 21 पुलिस अधिकारी सुरक्षा में तैनात किए जाएंगे।