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गुजरातः आनंदीबेन और शाह की गुटबाजी ने डुबोया?

Sun, 06 Dec 2015 04:17 PM IST
Updated Sun, 06 Dec 2015 04:17 PM IST
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Gujrat: Anandiben and Amit shah's Factionalism destroying

नरेंद्र मोदी की गैरहाजिरी में गुजरात में पहली बार एक बड़ा चुनाव खत्म हुआ है जिसमें ग्रामीण इलाकों में भारतीय जनता पार्टी की बुरी तरह हार हुई है। प्रदेश के भाजपा नेताओं ने हार की समीक्षा की जिसमें पार्टी में आंतरिक गुटबाजी एक अहम पहलू उभर कर सामने आया। लेकिन पार्टी किन दो गुटों में बंटी है, इस मामले में कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।

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लेकिन जहां जीत हुई है, वहां अपने कार्यकर्ताओं को टिकट दिलाने के लिए मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अपनी पूरी ताकत लगाने में जुट गए हैं। छह महानगरों में जीत पाने के बावजूद पिछले स्थानीय निकाय चुनावों के मुकाबले भाजपा की कई सीटें कम हुई हैं और कई दिग्गज नेता भी हार गए हैं। इनमें राजकोट के पूर्व मेयर अशोक डांगर भी शामिल हैं।
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हार का मुंह देखने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता अशोक डांगर ने बीबीसी को बताया कि उनकी हार के पीछे बाहरी कारण जो भी हो पार्टी के कुछ करीबी लोगों ने उन्हें हराने में काफी कोशिश की। हालांकि उन्होंने नाम लेने से इनकार कर दिया।
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महानगर चुनाव में कांग्रेस ने दिया टक्कर

Gujrat: Anandiben and Amit shah's Factionalism destroying

जब नरेंद्र मोदी ने दिल्ली का रुख किया तो मुख्यमंत्री के मसले पर उठे सवाल को अमित शाह को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष और आनंदीबेन पटेल को मुख्यमंत्री बनाकर हल किया गया था। बावजूद इसके, वास्तविकता ये है कि गुजरात की राजनीति में अमित शाह की आवाज को नकारा नहीं जा सकता।

शाह और पटेल दोनों ही अपना महत्व बनाए रखने की पूरी कोशिश करते हैं, इस कारण गुजरात चुनावों की हार के पीछे इन दोनों खेमों की आपसी प्रतिद्वंद्विता भी सामने आई है। चुनाव के दौरान पटेल युवाओं ने भाजपा के विरोध में आवासीय कालोनियों के बाहर नो एंट्री वाले बैनर लगाए थे और भाजपा का जमकर विरोध किया था।

गुजरात भाजपा के महामंत्री शब्दशरण ब्रह्मभट्ट ने बीबीसी से बातचीत में बताया, "कई जगहों से हमें ऐसी जानकारी मिली है कि पार्टी के खिलाफ भाजपा के ही कार्यकर्ताओं ने काम किया था, हार के पीछे यह भी एक कारण है जिसे हम गंभीरता से ले रहे हैं। जहां भी ऐसी घटना घटी है वहां के स्थानीय इकाई को हमने जिम्मेदार लोगों को निलंबित करने का आदेश दे दिया है।" लेकिन बात यहीं तक सीमित नहीं रही। जहां पर पार्टी ने चुनाव जीता है, वहां भी दो खेमे शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं।

वडोदरा में लगे विवादित पोस्टर

Gujrat: Anandiben and Amit shah's Factionalism destroying

ऐसी संभावना दिख रही है कि गुजरात के वडोदरा शहर में मेयर के पद पर मंत्री सौरभ पटेल के करीबी माने जाने वाले भरत डांगर को बिठाया जाएगा। वहीं पूरे वडोदरा शहर में विवादास्पद होर्डिंग लगे हैं, जिन पर लिखा है कि 'मेयर गरीब घर का होगा तो चलेगा, लेकिन शराबी, जुआरी और भू-माफिया नहीं चाहिए।'

इसी तरह भाजपा के दोनों गुट आम जनता के बीच एक दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। गुजरात के राज्य कानून मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा इस मामले में खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। फिर भी उन्होंने बताया कि जहां भी हार हुई है, कैबिनेट बैठक में उसको लेकर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई है।

उनका कहना है, "सिर्फ गुटबाजी या अंदरूनी विरोध के कारण यह परिणाम आया हो ऐसा नहीं है, अभी तक हमें हार का स्वीकार्य कारण नहीं मिला है।"

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