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'सच्चर कमेटी गैर-कानूनी, केवल मुस्लिमों के लिए'
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 28 Nov 2013 03:29 PM IST
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करीब आते चुनावों की वजह से एक तरफ नरेंद्र मोदी मुस्लिमों को रिझाने और उदारवादी छवि पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, दूसरी तरफ उनकी सरकार ने सच्चर कमेटी की आलोचना की है।
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इंडियन एक्सप्रेस की ख्ाबर के मुताबिक यूपीए सरकार की प्री-मैट्रिक अल्पसंख्यक स्कोलरशिप योजना को 'एकतरफा और भेदभावपूर्ण' करार देते हुए गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से शिकायत की है।
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मोदी सरकार ने कोर्ट से कहा कि राजेंद्र सच्चर की अगुवाई में गठित कमेटी असंवैधानिक है, क्योंकि 'इसका लक्ष्य केवल मुस्लिमों की मदद करना था।'
केंद्र सरकार का कहना था कि यह योजना वैध है और गुजरात में मुस्लिमों की बिगड़ती स्थिति के लिए केवल मोदी सरकार जिम्मेदार है। इसके जवाब में दाखिल हलफनामे में गुजरात सरकार ने उस तरीके की आलोचना की, जिसके तहत 2005 में पीएमओ ने सच्चर समिति का गठन किया था।
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राज्य सरकार का कहना है कि इस समिति ने केवल मुस्लिमों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का जायजा लिया, जबकि दूसरे धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
इसमें कहा गया है, "सच्चर कमेटी न तो संवैधानिक है और न ही वैधानिक। उसने सिख, ईसाई, बौद्ध धर्म का पालन करने वाले और पारसी जैसे अल्पसंख्यकों पर जरा भी विचार नहीं किया। इसलिए स्कोलरशिप योजना के लिए इसे आधार नहीं बनाया जा सकता...कमेटी का लक्ष्य केवल मुस्लिमों की मदद करना था।"