नरेंद्र मोदी के जिले में 'तालिबानी फरमान'
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महिलाओं को आजादी देने के मामले में बयानबाजी की बात आए जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी अन्य राजनीतिज्ञ से पीछे नहीं दिखते। मोदी की विश्वासपात्र और गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल स्त्री सशक्तिकरण का एक सशक्त नमूना भी हैं।
हालांकि इन्हीं दो नेताओं के गृह जिले में महिला शिक्षकों से अपनी मर्जी के कपड़े पहनने की आजादी भी छीन ली गई है। गुजरात के मेहषाणा जिले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने प्राइमरी स्कूलों में महिला शिक्षकों के लिए 'ड्रेस कोड' तय कर दिया है।
प्राइमरी स्कूलों में महिला शिक्षकों को साड़ी पहनकर आना अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि पुरुष शिक्षकों के लिए किसी भी प्रकार का 'ड्रेसकोड' तय नहीं किया गया है।
गुजरात में लड़कियों को जींस न पहनने की सलाह
गुजरात में महिलाओं को कपड़ों को लेकर पहले भी हिदायतें दी गई हैं। चंद दिनों पहले पोरबंदर में भी पुलिस ने लड़कियों को जींस न पहनने की सलाह दी थी। पुलिस ने पोस्टर चिपकाकार बाकायदा उस फरमान का प्रचार भी किया था।
अब राज्य के मेहषाणा जिले में महिला शिक्षकों का ड्रेसकोड तय किया गया है। माना जा रहा है कि गुजरात सरकार प्रदेश के सभी स्कूलों में ड्रेसकोड लागू करने पर विचार कर रही है।
सरकार ने इस संबंध में परामर्श देने के लिए भाजपा की राज्य इकाई के मीडिया सेल के प्रभारी जगदीश भवसार के नेतृत्व में कमेटी भी गठित की थी। कमेटी ने राज्य सरकार को स्कूलों में ड्रेसकोड लागू करने का सुझाव दिया है।
पुरुष शिक्षकों के लिए तय नहीं किया ड्रेसकोड
भवसार गुजरात विश्वविद्यालय की सीनेट के सदस्य भी हैं। राज्य सरकार को अभी भवसार की सिफारिशों पर फैसला लेना हैं, लेकिन मेहषाणा की जिला शिक्षा कमेटी ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
ये कमेटी जिला पंचायत के अधीन है और जिला पंचायत पर भाजपा का कब्जा है। कमेटी ने न केवल महिला शिक्षकों को साड़ी पहनना अनिवार्य किया है, बल्कि सलवार-कमीज पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।
कमेटी ने जींस पहनने की पूरी तरह से मनाही कर दी है, हालांकि पुरुष शिक्षकों के लिए ड्रेसकोड तय नहीं किया गया है।
अपनी मर्जी से लिया जिला कमेटी ने फैसला
कहा ये भी जा रहा है कि जिला कमेटी ने ये फैसला अपनी मर्जी से लिया है, राज्य सरकार द्वारा गठित की गई कमेटी की सिफारिशों का इससे कोई लेना देना नहीं है।
उस कमेटी ने शिक्षा में सुधार के लिए ड्रेसकोड से जुड़ी सिफारिशें की हैं, लेकिन वो इतनी सख्त नहीं है, जैसी जिला शिक्षा कमेटी की हिदायतें हैं।
राज्य सरकार की कमेटी ने महिलाओं को परिधान के रूप में साड़ी और सलवार-कमीज का विकल्प दिया है। हालांकि पुरुषों और महिलाओं, दोनों को ही जींस न पहनने देने की सिफारिश की गई है।
क्या कहते हैं भवसार
जगदीश भवसार ने बताया, ' मेहषाणा जिले में ड्रेसकोड तय किया गया है। हालांकि हमारी सिफारिशों में ये नहीं कहा गया है कि महिला शिक्षक केवल साड़ी पहने, कोई और परिधान नहीं।'
उन्होंने कहा कि ये सिफारिशें शैक्षणिक संस्थानों के संबंध में हैं, इसलिए जींस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। भवसार का कहना है कि सिफारिशों पर अंतिम फैसला राज्य सरकार को ही लेना है।