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ग्रीनपीस कर्मचारियों को भारत में नहीं मिली इंट्री

Mon, 08 Jun 2015 09:15 PM IST
एजेंसी / नई दिल्ली।
एजेंसी / नई दिल्ली। Updated Mon, 08 Jun 2015 09:15 PM IST
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Greenpeace staf entry ban in India

ग्रीनपीस इंडिया की महिला कार्यकर्ता प्रिया पिल्लई को जनवरी में विदेश जाने से रोकने के लिए विमान से उतारे जाने की घटना के कुछ माह बाद एनजीओ के सोमवार को दावा किया कि वैध दस्तावेज के बावजूद उसके एक अंतरराष्ट्रीय स्टाफ को भारत में घुसने नहीं दिया गया।

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 एनजीओ के मुताबिक ग्रीनपीस इंटरनेशनल के सदस्य एरॉन ग्रे-ब्लॉक शनिवार को सिडनी से भारत के लिए चले थे,लेकिन उन्हें बंगलूरू से लौटा दिया गया। ग्रे-ब्लॉक शनिवार को संगठन के स्टाफ के साथ बैठक करने वाले थे। वह ऑस्ट्रेलियाई पासपोर्ट पर यात्रा कर रहे थे।
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दावाः इंट्री से रोका, पासपोर्ट जब्त

Greenpeace staf entry ban in India

ग्रीनपीस इंडिया की ओर से जारी एक बयान में दावा किया गया है कि ग्रे-ब्लॉक को वापस भेजने के पीछे कोई औपचारिक कारण नहीं बताया गया है। उन्हें आधिकारिक तौर पर निर्वासित नहीं किया गया। उनके पास वैध व्यापारिक वीजा था। ग्रीनपीस इंडिया की प्रोग्राम निदेशक दिव्या रघुनंदन ने कहा कि ऐसा कोई कारण नहीं है जिससे कि एक स्टाफ के साथ इस तरह से मनमाने ढंग से पेश आया जाए। आशा है कि गृह मंत्रालय इस बारे में पूरा स्पष्टीकरण देगा।

एनजीओ का दावा है कि ग्रे-ब्लॉक को प्रवेश से रोका गया और उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया। बाद में उन्हें क्वालालंपुर की एक उड़ान में बैठा दिया गया। क्वालालंपुर में उतरने के बाद उनका पासपोर्ट उन्हें सौंपा गया। अब ग्रे-ब्लॉक ऑस्ट्रेलिया में हैं। एनजीओ ने यह भी कहा कि यह पहली बार नहीं है जब ग्रीनपीस के किसी स्टाफ को भारत में प्रवेश से रोका गया है।

बयान में कहा है कि वैध दस्तावेज के बावजूद उसके स्टाफ को प्रवेश से रोकना यह साबित करता है कि सरकार भारतीय संविधान और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ग्रीन पीस को प्राप्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन करने पर तुली हुई है।
 
ग्रीनपीस के स्टाफ को भारत में प्रवेश नहीं मिलने की घटना से कोई लेनादेना नहीं है। हम विभिन्न संगठनों की हिस्सेदारी का सम्मान करते हैं और देश की सुरक्षा के लिए एक दूसरा मंत्रालय ऐसे मामलों को देखता है। - प्रकाश जावड़ेकर, पर्यावरण मंत्री 

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