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बंद होने की कगार पर ग्रीनपीस इंडिया, निशाने पर सरकार

Wed, 06 May 2015 10:31 AM IST
Updated Wed, 06 May 2015 10:31 AM IST
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Greenpeace India on the verge of closure.

ग्रीनपीस इंडिया पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। पर्यावरण से जुड़े मुद्दे उठाने वाले इस संगठन के पास कर्मचारियों को तनख्वाह देने और ऑफिस चलाने के लिए केवल एक महीने का धन बचा है। संगठन ने इसके लिए सरकार को दोषी ठहराया है।

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ग्रीनपीस इंडिया के कार्यकारी निदेशक समित आइच ने कर्मचारियों को जल्द होने वाली बंदी के लिए तैयार रहने को कहा है। उन्होंने बताया कि संगठन को पूरी तरह से बंद होने से बचाने के लिए केवल एक महीने का समय बचा है।
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उनके अनुसार गृह मंत्रालय की ओर से संगठन के घरेलू बैंक खातों पर रोक लगाने के आदेश से 340 कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ गई है। इससे दीर्घकालीन विकास, पर्यावरणीय न्याय और साफ तथा सस्ती ऊर्जा के मुद्दे पर उठने वाली गरीबों की आवाज को भी झटका लगा है।
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हालांकि संगठन मंत्रालय के फैसले के खिलाफ अपील करने की तैयारी कर रहा है पर मामला एक जून के बाद तक भी खिंच सकता है। ग्रीनपीस इंडिया के पास तब तक के लिए पैसे नहीं हैं।

गृह मंत्रालय के फैसले को दोषी ठहराया

Greenpeace India on the verge of closure.

गृह मंत्रालय ने इसके पहले ग्रीनपीस इंडिया के विदेशी मदद लेने पर रोक लगाने के साथ, उसके लाइसेंस को छह महीने के लिए निलंबित कर दिया था। सरकार ने नोटिस जारी कर यह भी पूछा था कि क्यों नहीं संगठन का पंजीकरण हमेशा के लिए निरस्त कर दिया जाए।

संगठन को इन सारे मामलों में दिल्ली हाईकोर्ट से राहत मिली थी। अब अपने हालिया आदेश में गृह मंत्रालय ने संगठन के सभी घरेलू बैंक खातों से लेन-देन पर रोक लगा दी है। इन खातों के जरिये ही करीब 77 हजार लोग भारत में संगठन को दान करते हैं।

‘छल से गला घोंटने की कोशिश’
ग्रीनपीस इंडिया की वरिष्ठ कार्यकर्ता प्रिया पिल्लई ने सीधे गृह मंत्री राजनाथ सिंह पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री छल से हमारा गला घोंटने की कोशिश कर रहे हैं। वह भी जानते हैं कि खातों पर प्रतिबंध असंवैधानिक हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ग्रीनपीस इंडिया के बाद अगला नंबर किसका होगा। बता दें कि भारत सरकार ने प्रिया पिल्लई की विदेश यात्राओं पर रोक लगा दी थी।

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