फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Green tribunal demands to ban on Volkswagen cars in India

'अब भारत में भी लगे फॉक्सवैगन कारों पर प्रतिबंध'

Fri, 27 Nov 2015 06:40 AM IST
Updated Fri, 27 Nov 2015 06:40 AM IST
विज्ञापन
Green tribunal demands to ban on Volkswagen cars in India

यूरोप की मशहूर ऑटो निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन की भारतीय समूह कंपनी स्कोडा के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की गई है। याचिका में कंपनी पर आरोप है कि इनकी कारें तय उत्सर्जन मानकों का उल्लंघन करती हैं। याची ने कंपनी के कारों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। ग्रीन ट्रिब्यूनल 30 नवंबर को इस केस पर विचार करेगा।

विज्ञापन


दिल्ली के एक निजी स्कूल में पढ़ाने वाली सलोनी आइलावाडी ने अपनी याचिका में कहा है कि कंपनी द्वारा बेची जाने वाली कुछ कारें तय मानकों से नौ गुना ज्यादा नाइट्रोजन ऑक्साइड गैस का उत्सर्जन करती हैं। सलोनी ने बताया कि हाल ही में उनके पिता एससी मंजुल की स्वास्थ्य जांच में कैंसर का पता चला है। यह कैंसर अंतिम अवस्था (चौथे चरण) में है।
विज्ञापन


यह स्थापित तथ्य है कि दिल्ली जैसे महानगर में वाहनों से होने वाले खतरनाक गैसों के उत्सर्जन से वायु प्रदूषित हो रही है। इसके चलते लोगों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझकर जान गंवानी पड़ रही है। इसलिए कंपनी को कारों की बिक्री ही नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और एसेंबलिंग की भी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। याचिका में मिनिस्ट्री ऑफ हैवी इंडस्ट्रीज एंड पब्लिक इंटरप्राइजेज, पर्यावरण मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, फॉक्सवैगन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, स्कोडा ऑटो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, फॉक्सवैगन ग्रुप सेल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को पार्टी बनाया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

फॉक्सवैगन ने कारों में कमी को स्वीकारा

Green tribunal demands to ban on Volkswagen cars in India

याचिका में यह भी कहा गया है कि हाल ही में सरकार ने कंपनी को उत्सर्जन मानकों का उल्लंघन करने के लिए कारण बताओ नोटिस दिया था। पुणे में स्थित ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया की जांच रिपोर्ट के आधार पर फॉक्सवैगन को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

इस रिपोर्ट में कहा गया था कि कंपनी की कुछ डीजल कारें तय मानकों से अधिक नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जित कर रही हैं। याचिका में मांग की गई है कि फॉक्सवैगन की जो भी कारें आयात हों, उनकी विस्तृत जांच होनी चाहिए और तब तक बिक्री नहीं होनी चाहिए, जब तक यह स्पष्ट न हो जाए कि ये ठीक हैं।


हाल ही में फॉक्सवैगन ने भी यह स्वीकार किया था कि उसकी करीब 11 लाख डीजल इंजन कारों में एक सॉफ्टवेयर लगा था, जो उत्सर्जन जांचों को प्रभावित करता था। वहीं याची सलोनी के पति संजीव आइलावाडी ने कहा कि यदि मेरी गाड़ी तय मानकों का उल्लंघन करती है तो चालान कटता है, जबकि कंपनियां खुलेआम इन मानकों का उल्लंघन कर रही हैं और इनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed