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हजारों किसानों का दिल्ली कूच, सरकार के हाथ पांव फूले

Fri, 05 Oct 2012 02:10 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 05 Oct 2012 02:10 PM IST
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grand padyatra as 35000 gwalior farmers begin march to delhi
हजारों किसान ग्वालियर से राजधानी दिल्ली की ओर कूच कर गए हैं। यह काफिला 12 किलोमीटर लंबा है। किसानों की इस जनसत्याग्रह यात्रा का मकसद सरकार का अपनी समस्याओं की ओर ध्यान दिलाना है। इन किसानों ने केंद्र सरकार से जमीन को लेकर कई सुधारों की मांग की है। किसानों के इस जोरदार विरोध को देखकर केंद्र सरकार के हाथ पांव फूलने लगे हैं।
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मार्च में देश भर के किसान हिस्सा ले रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे अपने बच्चों के लिए यह लड़ाई लड़ रहे हैं। एकता परिषद के बैनर तले विरोध कर रहे किसानों का ये मार्च मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा से गुजरते हुए 29 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचेगा। ये किसान हर रोज 15 से 20 किलोमीटर तक का सफर तय करेंगे। ये किसान सड़क पर ही खाना बनाते हैं और सड़क पर ही उनकी रात गुजरती है।
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मार्च आयोजित करने वाले एकता परिषद के प्रवक्ता अनीश थिलेंकरी के मुताबिक जब तक किसान नई दिल्ली पहुचेंगे यह संख्या बढ़ कर एक लाख तक पहुंच जाएगी। मार्च में 26 राज्यों के किसान हिस्सा ले रहे हैं। मार्च में हिस्सा लेने वाले अधिकतर लोग गरीब किसान हैं या अल्संख्यक हैं जिनका मानना है कि सरकार उनके विकास के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है। मार्च में उड़ीसा की जनजातियां और दक्षिण भारत के मछुआरे भी शामिल हैं।
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2007 में एकता परिषद व उसके सहयोगी संगठनों ने इसी उद्देश्य से विशाल पदयात्रा आयोजित की थी। सरकार ने तब वायदे तो किए थे पर उन्हें पूरा नहीं किया। दो अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर ग्वालियर के मेला मैदान में करीब 25 हजार किसान इकट्ठा हुए थे। किसानों को समझाने के लिए ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश और वाणिज्य उद्योग राज्य मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सीधे दिल्ली से ग्वालियर पहुंचे थे। लेकिन उन्हें समझाने में दोनों को सफलता नहीं मिली। मंत्री जी को डर सता रहा है कि अगर देश के दूर-दराज के इलाकों से हजारों की तादाद में किसानों ने दिल्ली में डेरा जमा लिया तो क्या होगा?


किसानों की मांगें

-किसानों की मांग है कि जल्द से जल्द राष्ट्रीय भूमि सुधार परिषद का गठन हो। भारत के हर नागरिक को घर बनाने लायक जमीन दी जाए।

-किसानों की मांग है कि जमीन का प्रयोग केवल खेती के लिए ही किया जाए। एक ऐसी राष्ट्रीय नीति बनाई जाए जो आज तक कभी बनाई ही नहीं गई।

-आदिवासी क्षेत्रों के लिए लागू कानून सख्ती से लागू हों, महिलाओं को भी किसान का दर्जा मिले। केंद्र सरकार की ओर से लैंडपूल बने ताकि देशभर में खाली पड़ी जमीन के बारे में पता चल सके। इसके साथ ही जमीन विवाद के निपटारे के लिए विशेष अदालत भी बने।
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