संसद में पांच मंत्रियों का इस्तीफा मांगेगा महागठबंधन
बिहार के बाद अब मोदी सरकार और भाजपा को संसद के शीतकालीन सत्र में महागठबंधन का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस, जदयू और राजद एकजुट होकर संसद सत्र में असहिष्णुता के मुद्दे पर विवादित बयान देने वाले पांच मंत्रियों, वीके सिंह, महेश शर्मा, निरंजन ज्योति, संजीव बालियान और गिरिराज किशोर का इस्तीफा मांगने की रणनीति बना रहे हैं।
इसके अलावा आरक्षण मसले पर संघ प्रमुख के बयान को लेकर भी हंगामा बरपाने की तैयारी है। इससे जीएसटी समेत सरकार के तमाम विधेयक खटाई में पड़ सकते हैं। 27 तारीख से शुरू होने वाला शीत सत्र सरकार के लिए आसान नहीं होने जा रहा। महागठबंधन राज्यसभा में संख्या बल के दम पर मोदी सरकार को कड़ी चुनौती देने की रणनीति बना रहा है।
जदयू और राजद एनडीए सरकार के मंत्रियों के इस्तीफे पर जोर दे रहे हैं, जबकि कांग्रेस असहिष्णुता को लेकर राज्यसभा में पूरे सदन की ओर से निंदा प्रस्ताव पारित कराने के पक्ष में है।
सत्र से पहले हो सकती बैठक
गठबंधन के एक नेता ने कहा कि राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से लेकर धर्म गुरु दलाई लामा तक ने असहिष्णुता के मुद्दे पर सरकार के रवैये की निंदा की है। इसलिए अब वक्त आ गया है कि प्रधानमंत्री बयानबाजी के अलावा कोई कार्रवाई करें।
पीएम से स्पष्टीकरण की भी मांग की जा सकती है। महागठबंधन के प्रमुख नेताओं की 22 नवंबर के बाद सत्र से पहले बैठक हो सकती है। अभी इंतजार केवल नीतीश कुमार के बिहार में मुख्यमंत्री पद ग्रहण करने का है।
फिलहाल राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद साथी दलों से बात कर रहे हैं। महागठबंधन की कोशिश बसपा, तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी और वामदलों को भी अपने साथ जोड़ने की है। साथ ही समाजवादी पार्टी को भी इस विरोध में शामिल करने की बात चल रही है।