अब नहीं होगी एलपीजी गैस चोरी, क्योंकि आ रहे हैं पारदर्शी सिलेंडर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय उपभोक्ताओं के हितों को बेहतर तरीके से पूरा करने के लिए कदम बढ़ा रहा है। इसके तहत सरकार अब एलपीजी सिलेंडरों में की जाने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए पारदर्शी सिलेंडर लांच करने की योजना बना रही है, ताकि गैस में किसी भी तरह की मिलावट, घटतोली व अन्य गड़बड़ियों को पकड़ा जा सके।
इसके साथ ही सरकार शहरी क्षेत्रों के बाद अब देश के ग्रामीण इलाकों में भी 5 किलोग्राम क्षमता वाले गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने की तैयारी में है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के अधिकारियों को सरकार के इस एजेंडे को पूरा करने के लिए रोडमैप तैयार करने को कहा है।
स्वयं अपने मंत्रालय और तेल कंपनियों के एक वर्ग की ओर से कुछ विरोध के बावजूद प्रधान ने इस पर दृढ़ता दिखाते हुए अधिकारियों से योजना को आगे बढ़ाने के लिए कहा है।
जानकारी के मुताबिक पारदर्शी (ट्रांसपेरेंट) गैस सिलेंडर की लागत मौजूदा सिलेंडर के मुकाबले तकरीबन दोगुनी होगी। इन सिलेंडरों की लागत 2,500 रुपये से 3,000 रुपये के बीच बैठने की संभावना है, जबकि मौजूदा समय में दिए जा रहे लोहे के गैस सिलेंडरों के लिए ग्राहकों से सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में 1,400 रुपये जमा कराए जाते हैं।
सरकार का इस बारे में मानना है कि उपभोक्ताओं को अगर कुछ ज्यादा लागत चुका कर एक बेहतर व पारदर्शी व्यवस्था मिले, जिससे उन्हें अपने पैसे की पूरी कीमत की गैस मिल सके, तो लोग इस बढ़ी हुई लागत को चुकाने से हिचकिचाएंगे नहीं।
उपभोक्ताओं को कम गैस मिलने की रहती है शिकायत
वर्तमान में काफी बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं की यह शिकायत रहती है कि वेंडरों द्वारा उन्हें सिलेंडर में कम गैस मिल रही है। हालांकि मौजूदा व्यवस्था में भी सिलेंडर की डिलीवरी करने वाले वेंडरों के पास वजन करने का उपकरण रखने की शर्त शामिल है, पर व्यवहार में आमतौर पर ऐसा होता नहीं है।
इसलिए सरकार मार्च 2016 तक बाजार में पारदर्शी गैस सिलेंडर लाना चाहती है। शुरुआती दौर में आयातित सिलेंडरों के जरिए योजना को अमल में लाया जाएगा।
मंत्रालय को देशभर से लगातार एलपीजी वितरकों के खिलाफ शिकायतें मिल रही हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें कम गैस वाले सिलेंडर दिए जा रहे हैं और गैस वितरण की पूरी प्रणाली में कोई पारदर्शिता नहीं है। इसे देखते हुए ही सरकार व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए पारदर्शी सिलेंडर उपलब्ध कराने की योजना बना रही है।
सरकार का मानना है कि इससे एलपीजी उपभोक्ताओं को उनके द्वार अदा की जा रही पूरी कीमत की गैस मिल सकेगी। पेट्रोलियम मंत्री ने इस योजना को जल्द से जल्द अमल में लाने के पक्ष में हैं और इसके लिए वह मंत्रालय व तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक भी कर चुके हैं। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) से इस योजना को अमल में लाने के लिए खुद को तैयार करने को कहा गया है।
सरकार के इस कदम को आने वाले समय में तेल व गैस क्षेत्र में निजी कंपनियों की ओर से मिलने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए सरकारी तेल तेल-गैस कंपनियों को तैयार करने की दिशा में की जा रही एक पहल के रूप में भी देखा जा रहा है।
माना जा रहा है कि सरकार आने वाले समय में तेल व गैस की कीमतों के निर्धारण से खुद को पूरी तरह से अलग कर इस क्षेत्र में अपना दखल कम करना चाहती है।
इसके साथ ही सरकारी कंपनी आईओसी स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में भी 5 किलोग्राम गैस वाले सिलेंडर उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम कर रही है।