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आदर्श नियोक्ता की तरह आचरण करे सरकार: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Sun, 02 Dec 2012 08:22 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार को एक आदर्श नियोक्ता की भांति आचरण करना चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि नियुक्ति और प्रोमोशन में उसके कर्मचारियों के साथ भेदभाव नहीं किया जाए। सर्वोच्च न्यायालय ने नियुक्ति और प्रोमोशन के मामले में नियमों का सही तरीके से पालन नहीं करने पर असम सरकार की खिंचाई की।
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जस्टिस केएस राधाकृष्णन और दीपक मिश्रा की बेंच ने कहा कि अच्छे शासन की अवधारणा उसी वक्त मजबूत होगी जब सरकारी कर्मियों को यह विश्वास हो कि उनके साथ निष्पक्ष व्यवहार होगा और उनके भरोसे के साथ धोखा नहीं किया जाएगा।
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बेंच ने कहा कि यह माना जाता है कि सरकार एक आदर्श नियोक्ता है। इसलिए उससे यह आशा की जाती है कि वह अपने बनाए नियमों का सम्मान करते हुए सही ढंग से काम करे। बेंच ने असम सरकार को नियमों का सही ढंग से पालन नहीं आड़े हाथों लिया।
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बेंच ने कहा कि यह बात हमेशा दिमाग में रखनी चाहिए कि कर्मचारियों की वाजिब आकांक्षाओं का दमन न हो। साथ ही ऐसे हालात भी नहीं पैदा होने चाहिए जिससे उनकी उम्मीद निराशा में बदल जाएं। हर एक व्यक्ति की उम्मीद बेशकीमती होती है और आदर्श नियोक्ता को कर्मचारियों की वरिष्ठता के मामले में शतरंज का खेल नहीं खेलना चाहिए।
कोर्ट का यह निर्णय असम पुलिस अधिकारियों की याचिकाओं पर आया है। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार ने विशेष भर्ती बैच के तहत नियुक्ति के मामले में नियमों का उल्लंघन किया है। इस दौरान 1993-1994 में असम पुलिस सेवा में कार्यरत अधिकारियों को प्रोमोशन दिया गया था।