गंगा को भूल सरस्वती नदी का पता लगाने में जुटी मोदी सरकार
मोदी सरकार के तीसरे आम बजट में गंगा को लेकर पहले जैसा उत्साह नजर नहीं देखने को मिला है। गंगा को नजरअंदाज कर सरकार अब सरस्वती नदी के खोज को प्रमाणिकता प्रदान करने में जुट गई है।
हरियाणा और राजस्थान के इलाकों में मिली नदी के जल की धारा सरस्वती की है इसे प्रमाणित करने के लिए केंद्रीय जलसंसाधन मंत्रालय ने विशेषज्ञों का एक विशेष कार्यदलह गठित किया है। जोकि सरस्वती की प्रमाणिकता को साबित करेगा।
केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्रोद्धार मंत्री उमा भारती ने इस आशय की जानकारी देते हुए कहा है कि हरियाणा और राजस्थान सरकार के प्रयास से बीते वर्ष हुई खुदाई में नदी के होने का प्रमाण मिला है। रिमोट सेंसिंग के जरिए इसरों ने भी इस जानकारी को पुख्ता किया है कि उत्तराखंड के आदी ब्रदी से लेकर हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के इलाके में नदी का श्रोत है। यह श्रोत सरस्वती नदी है कि कोई और नदी इसके लिए मंत्रालय ने विशेषज्ञों के नेतृत्व में एक विशेष कार्यबल बनाया है। जोकि तय करेगा कि नदी का यह श्रोत सरस्वती है या नहीं।
'सरकार गंगा को लेकर उदासीन नहीं है'
वहीं आम बजट में गंगा पर सरकार की उदासीनता के आरोप को खारिज करते हुए उमा ने कहा कि सरकार गंगा को लेकर उदासीन नहीं है। उन्होंने कहा कि 13 मई 2015 को केंद्रीय मंत्रीमंडल ने नमामि गंगे अभियान के लिए 20 हजार करोड़ का जो फंड जारी किया है।
वह न लैपसेबल फंड है। जिसे बाद में भी खर्च किया जा सकता है। हालांकि केंद्रीय मंत्री गंगा पर सरकार की उदासीनता को बेशक खारिज कर रही हैं लेकिन आम बजट में गंगा की उपेक्षा से गंगा को स्वच्छ एवं निर्मल बनाने के सरकार के वायदे पर सवाल उठने लगे हैं। वर्ष 2015-16 के आम बजट में सरकार ने नमामि गंगे को 2150 करोड़ का बजट आवंटित किया था। लेकिन संशोधित बजट में कटौती करते हुए इसे महज 1000 करोड़ तक सीमित रख दिया गया।
इस वर्ष 2016-17 के आम बजट में भी नमामि गंगे के बजट में मामूली बढ़ोत्तरी करते हुए जेटली ने महज 2200 करोड़ का प्रावधान किया है। जिससे यह जाहिर होता है कि गंगा के प्रति सरकार के उत्साह में कमी आई है। मगर उमा भारती का कहना है कि सरकार के उत्साह में कमी नहीं है। गंगा की स्वच्छता में बजट आडे़ नहीं आएगा। उन्होंने कहा है कि गंगा स्वच्छता अभियान के प्रयासों का असर अक्टूबर से जमीन पर दिखने लगेगा।