सरकार ने दिया बंद का जवाब, एफडीआई अधिसूचना जारी

नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 21 Sep 2012 02:27 AM IST
govt reply on bharat bandh to issue fdi notification
महंगाई और एफडीआई पर विपक्ष द्वारा बृहस्पतिवार को आयोजित दिन भर के भारत बंद का करारा जवाब सरकार ने शाम होते होते ही दिया, जब उसने पलटवार के रूप में एफडीआई की अधिसूचना जारी कर दी।

सरकार ने साफ कर दिया कि राजनीतिक और जन विरोध के बावजूद वह अपने आर्थिक सुधार कार्यक्रम से पीछे नहीं हटेगी। अधिसूचना जारी होने के बाद 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रिटेल एफडीआई में विदेशी पूंजी निवेश का रास्ता साफ हो गया है। सूत्रों ने कहा है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शुक्रवार को एफडीआई के मुद्दे पर राष्ट्र को संबोधित कर सकते हैं।

इससे पहले दिन भर देश में बंद का मिला-जुला असर दिखा। उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में रेल और सड़क यातायात जबर्दस्त ढंग से बाधित हुआ। वहीं दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, ओडिशा, गुजरात और कर्नाटक भी प्रभावित रहे। महंगाई के सवाल पर जनता ही नहीं, बल्कि विभिन्न विचारधारा वाले दलों ने भी एक मंच पर आकर इस बंद को नया आयाम दे दिया।

इमरजेंसी के बाद पहला मौका आया, जब वामपंथी दल और भाजपा एक मंच पर पहुंचे। कोल आवंटन और ममता बनर्जी की समर्थन वापसी के ऐलान के बाद भगवा और लाल ब्रिगेड के एक मंच पर आने से यूपीए सरकार की मुश्किलें कुछ बढ़ती हुई दिख रही हैं। बंद के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ, व्यापारियों और आम लोगों का गुस्सा भी सड़कों पर दिखा। पूरे देश से एक सुर में केंद्र सरकार से डीजल-रसोई गैस तथा खुदरा क्षेत्र में एफडीआई के फैसलों को वापस लेने की मांग की गई।

सरकार पर चौतरफा दबाव बढ़ाते हुए एनडीए, लेफ्ट, सपा समेत विभिन्न दलों ने चेतावनी दी कि जन विरोधी फैसले वापस लेने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। बंद में सरकार की सहयोगी द्रमुक भी शामिल थी। बहरहाल, भारत बंद शांति पूर्वक निपट गया। बंद से हालांकि जरूरी सेवाओं को मुक्त रखा गया था, इसके बावजूद देश भर में लगभग 250 ट्रेनें प्रभावित हुई। बंद में शामिल दलों के नेताओं-कार्यकर्ताओं ने रैलियां निकाली और गिरफ्तारियां दीं।

सबसे महत्वपूर्ण घटना दिल्ली के जंतर-मंतर पर घटी। व्यापारियों द्वारा आयोजित सभा में भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी, डॉ.मुरली मनोहर जोशी, एनडीए संयोजक व जदयू प्रमुख शरद यादव, माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य सीताराम येचुरी और भाकपा के पूर्व महासचिव एबी बर्धन एक मंच पर दिखे। गडकरी के अनुसार इमरजेंसी के बाद यह पहला मौका है जब विभिन्न विचारधाराओं के नेता केंद्र सरकार के खिलाफ संघर्ष में एक साथ आए।

बर्धन ने कहा, ‘वामदलों और भाजपा की विचारधारा भले अलग-अलग हों लेकिन जब जनता के हक में लड़ने का मौका आएगा तो वे एक हैं।’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपने दोस्त बराक ओबामा को खुश करने के लिए ऐसे फैसले रहे हैं। वहीं डॉ. जोशी ने कहा कि कांग्रेस जनता और व्यापारियों को अमेरिका तथा यूरोपीय देशों की गुलाम बना देना चाहती है। वैसे जंतर-मंतर पर ही कुछ दूरी पर मौजूद सपा प्रमुख मुलायम सिंह और टीडीपी प्रमुख चंद्र बाबू नाएडू ने इस मंच से दूरी बनाए रखी।

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