'ट्रक चालकों की हड़ताल से 11,500 करोड़ का घाटा'
टोल प्लाजा खत्म करने सहित अन्य मांगों को लेकर ट्रक चालक अनिश्चितकालीन देशव्यापी हड़ताल पर चले गए हैं। राहत की बात यह है कि आवश्यक वस्तुएं जैसे दूध, सब्जियां और दवाओं को हड़ताल के दायरे से बाहर रखा गया है।
अखिल भारतीय मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के अध्यक्ष भीम वाधवा की मानें तो इस हड़ताल से पहले ही दिन ट्रक चालकों को जहां 1,500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ वहीं सरकार को इससे 10,000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। अकेले राजस्थान में 500 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ।
एआईटीएमसी की मांग है कि टोल प्रणाली को समाप्त किया जाए। इसका कहना है कि टोल प्रणाली परेशान करने का एक जरिया है। इसके अलावा एआईएमटीसी करों के एक बार भुगतान और टीडीएस प्रक्रिया के सरलीकरण की मांग भी कर रहा है।
एआईएमटीसी के अध्यक्ष वाधवा ने कहा कि ट्रांसपोर्ट कारोबार पर टीडीएस के प्रावधानों को प्री-फाइनेंस एक्ट, 2015 में लाने की मांग थी और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आश्वासन दिया था कि वह इस मसले पर सीबीडीटी के अध्यक्ष के साथ बैठक करेंगे।
वाधवा ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से आ रही रिपोर्ट के अनुसार हमारा अनिश्चितकालीन हड़ताल सफल रही है। एआईएमटीसी के नेता चरण सिंह लोहारा ने कहा, ‘हमने नई बुकिंग और सामान पहुंचाने का काम रोक दिया है। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के लगभग दो लाख ट्रक चालकों ने बृहस्पतिवार को इस हड़ताल का समर्थन किया है।’
सरकार ने मांग मानने से किया इंकार
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एआईएमटीसी से अपील की कि वे हड़ताल समाप्त करें। साथ ही उन्होंने कहा कि टोल प्रणाली को हटाया नहीं जा सकता है।
गडकरी ने कहा, ‘हड़ताल जारी रखना या तोड़ना एआईएमटीसी के ऊपर है। सरकार टोल को समाप्त नहीं कर सकती। हमने पहले ही उन्हें आश्वस्त किया है कि दिसंबर तक देश भर में इलेक्ट्रॉनिक टोल प्रणाली लागू कर दी जाएगी।’
उन्होंने कहा कि सरकार टांसपोर्टरों के लिए अच्छे राजमार्ग बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस बात को लेकर गंभीर है कि उन्हें टोल प्लाजा के पास इंतजार नही करना पड़े।
वाधवा ने कहा कि नितिन गडकरी द्वारा सुझाया गया इलेक्ट्रॉनिक टोल प्रणाली कोई समाधान नहीं है क्योंकि सरकार की ई-टोलिंग परियोजना एक असफल धारणा है और तो और उनकी पायलट परियोजना भी असफल रही है।
आईसीआईसीआई और एक्सिस जैसे साझेदार बैंकों ने भी इस परियोजना से अपनी दूरी बना ली। एआईएमटीसी ने दावा किया कि देश भर के 87 लाख ट्रक और 20 लाख बसें और टेम्पो इसके सदस्य हैं।
ट्रक चालकों का एक दूसरा संगठन ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन ने खुद को इस हड़ताल से दूर रखा है। ट्रकों के हड़ताल का सबसे ज्यादा असर राजस्थान, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में देखा गया।