सरकार ने मानी OROP की मांग, पूर्व सैनिकों को फैसला नामंजूर
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पूर्व सैनिकों की काफी समय से चली आ रही वन रैंक वन पेंशन की मांग को पीएम मोदी ने मंजूरी दे दी है। सूत्रों के अनुसार सरकार अगले दो दिनों में इसका ऐलान कर सकती है। लेकिन धरने पर बैठे सैनिक इससे सहमत नजर नहीं आ रहे हैं।
जंतर-मंतर पर धरना दे रहे रिटायर सैनिकों का कहना है कि वो सरकार से सहमत नहीं हैं और सरकार का एकतरफा फैसला है। सरकार ने समीक्षा अवधि के अलावा पूर्व सैनिकों की सारी मांगे मान ली हैं।
सरकार हर पांच साल पर पेंशन एकरुपता की समीक्षा करेंगी। जबकि पूर्व सैनिक समीक्षा हर वर्ष कराने की मांग कर रहे हैं। वन रैंक वन पेंशन को 1 जुलाई 2014 से लागू किया जा सकता है। जहां पूर्व सैनिकों को पेंशन का एरियर चार किस्तों में दिया जाएगा।
वहीं शहीदों की विधवाओं को एक मुश्त एरियर दिया जाएगा। वन रैंक वन पेंशन को एक जुलाई 2014 से शुरू किया जा सकता है,जबकि 2013 को इसका बेस ईयर माने जाने की बात कही जा रही है।
विसंगतियों को दूर करने के लिए न्यायिक समिति
ओआरओपी की संभावित विसंगतियों को दूर करने के लिए एक न्यायिक समिति बनायी जाएगी,यह समिति छह माह में रिपोर्ट देगी।
सूत्रों के अनुसार वन रैंक वन पेंशन का लाभ उन सैनिकों को नहीं मिलेगा जिन्होंने वीआरएस स्कीम का लाभ ले लिया है। सूत्रों के अनुसार अगर सरकार ओआरओपी की शुरूआत करती है तो उसपर सालाना 8000 से 10000 करोड़ को बोझ बढ़ेगा।
इस बजट में सरकार ने डिफेंस की पेंशन के लिए 54500 करोड़ का प्रावधान रखा है।
गौरतलब है कि पूर्व सैनिक ओआरओपी की शुरूआत करने के लिए अप्रैन 2014 पर अड़े हैं,जबकि सरकार चाहती है कि इसकी शुरुआत जुलाई से की जाए क्योंकि मोदी सरकार ने कार्यभार 26 मई 2014 को संभाला था।