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बेघरों को घर मुहैया कराने का मसौदा तैयार
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Fri, 15 Mar 2013 01:08 AM IST
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अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यूपीए सरकार ने ग्रामीण इलाकों के बेघरों को घर मुहैया कराने के लिए अध्यादेश का मसौदा तैयार कर लिया है।
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आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय आवासीय भूखंड अधिकार बिल, 2013 तैयार किया है जो कि अंतर मंत्रालयी विचार विमर्श के लिए लगभग तैयार है।
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11वीं योजना के दस्तावेजों के अनुसार ग्रामीण भारत में 1.30 करोड़ से 1.80 करोड़ परिवार भूमिहीन हैं। इनमें से 80 लाख परिवारों के पास घर भी नहीं हैं।
अब कल्याण मानकों में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ग्रामीण इलाकों के बेघरों को एक ऐसा आवासीय भूखंड पाने का अधिकार मिले जो कि कम से कम 435 वर्ग फुट में हो।
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इस अध्यादेश में कहा गया है कि लोगों को आवास तय समय सीमा में मिलने चाहिए और योजनाएं जनपद व राज्य स्तर पर सहमति के बाद बनाई जानी चाहिए।
इस बिल के लिए पिछले साल अक्टूबर में आगरा में एकता परिषद के गांधीवादी कार्यकर्ता पीवी राजगोपाल व केंद्र सरकार के बीच दस सूत्री समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे।
राजगोपाल ने बेघर गरीबों के आंदोलन का नेतृत्व किया था। सरकार की ओर से हस्ताक्षर करने वाले ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने भूमि सुधार करने का वादा किया था।
भूमि सुधार व छत के कानूनी अधिकार के वादे के बाद हजारों भूमिहीन गरीबों ने अपने दिल्ली मार्च आंदोलन को रोका था।
सरकार के अनुसार ग्रामीण परिवारों में सबसे गरीब व कमजोर वह है जिसके पास न जमीन है और न घर। गांवों में ऐसे लाखों लोग हैं जिनके पास अपना घर नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने कई आदेशों में कहा है कि प्रत्येक के सिर पर छत के मुद्दे को मूलभूत मानव अधिकारों में रखने की जरूरत है और यह व्यक्ति को उसकी गरिमा की गारंटी देने वाला मौलिक अधिकार बने।
सरकार को उम्मीद है कि कम से कम 435 वर्गफुट का भूखंड देने से गरीब बेघर अपना घर बना सकेंगे व बकरी- मुर्गीपालन, फल- सब्जियों की खेती आदि कर सकेंगे।