'विदेशी संपत्तियां घोषित न करने वालों की खैर नहीं'
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कंप्लायंस विंडो के माध्यम से विदेश में रखे कालेधन की घोषणा न करने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई का संकेत देते हुए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि अब ऐसे लोगों तक आयकर अधिकारियों के पहुंचने की सूचना का जोखिम है, जबकि जिन लोगों ने कालेधन की घोषणा कर दी है वे चैन की नींद सो सकते हैं।
उन्होंने एचएसबीसी में रखे 6,500 करोड़ रुपये कालेधन और कंप्लायंस विंडो के माध्यम से घोषित 3,770 करोड़ रुपये के बीच तुलना करने को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि कालेधन का एक बड़ा हिस्सा देश में ही है और इसके लिए प्लास्टिक मनी (क्रेडिट या डेबिट कार्ड) के जरिये लेन-देन को प्रोत्साहित करने और नकदी के जरिये होने वाले लेनदेन को अपवाद बनाने की जरूरत है।
इसके लिए सरकार विभिन्न प्राधिकरणों के साथ काम कर रही है। इसके अलावा, जेटली ने कहा कि मुद्रा योजना के तहत बैंकों से दिए जाने वाले लोन एंटरप्रेन्योर केवल एटीएम से ही निकाल सकते हैं।
वित्तमंत्री ने कहा है कि घरेलू कालेधन पर नकेल कसने के लिए सरकार एक सीमा से अधिक के नकद लेनदेन के लिए पैन कार्ड की जानकारी देना अनिवार्य करने वाली है।
उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में कहा है, ‘एक खास सीमा से अधिक के नकद लेनदेन पर पैन से जुड़ी जानकारी देना अनिवार्य करने की जरूरत पर सरकार की बातचीत अंतिम दौर में है।’
दिसंबर में सूची जारी करेगा स्विस बैंक
जिन भारतीय और विदेशी खाता धारकों के नाम जांच के रडार पर हैं उनके नामों का खुलासा करते हुए स्विटजरलैंड अब दिसंबर में खातों की सूची करेगा। इसमें वैसे खातों की जानकारी होगी जो पिछले 60 साल से निष्क्रिय पड़े हैं।
स्विटजरलैंड पहली बार इस तरह की सूची जारी करने जा रहा है। उल्लेखनीय है कि यहां के बैंक खाता धारकों से जुड़ी जानकारियां गोपनीय रखने के बारे में जाने जाते हैं लेकिन अब इस गोपनीयता से हाल ही के वर्षों में पर्दा उठना शुरू हो गया है।
यह सूची स्विस बैंकिंग ओम्बुड्समैन द्वार प्रकाशित किया जाएगा। इसके लिए स्विटजरलैंड के सभी बैंकों से लंबे समय से भारत यहित अन्य देशों के नागरिकों के निष्क्रिय पड़े खातों के आंकड़े जुटाए जाएंगे।