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वन रैंक वन पेंशन मंजूर, लेकिन पूर्व सैनिक नाखुश

Sun, 06 Sep 2015 08:28 AM IST
Updated Sun, 06 Sep 2015 08:28 AM IST
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Govt has decided to implement OROP says Defence Minister

नरेंद्र मोदी सरकार ने पूर्व सैनिकों के लिए बहुप्रतीक्षित वन रैंक वन पेंशन को मंजूरी देते हुए इसे दो महीने के भीतर लागू करने का ऐलान कर दिया है, लेकिन 84 दिनों से धरने पर बैठे पूर्व सैनिकों ने सरकार की वीआरएस और पेंशन की पांच साल की समीक्षा संबंधी पेशकश को खारिज कर आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है।

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बिहार चुनाव के दबाव में रक्षा मंत्री मनोहर परिकर की ओर से किए गए इस ऐलान के बावजूद सरकार की मुसीबत कम नहीं हुई है। हालांकि, आंदोलनकारियों ने ओआरओपी को मंजूरी का सैद्धांतिक तौर पर स्वागत कर सरकार को थोड़ी राहत जरूर दी है।
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परिकर ने शनिवार सुबह आंदोलनकारियों से समझौते के अंतिम मसौदे पर बातचीत के बाद ओआरओपी का औपचारिक ऐलान करते हुए कहा कि यह स्कीम जुलाई 2014 से लागू की जाएगी। पूर्व सैनिकों ने इसे अप्रैल से लागू करने की मांग की थी।
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परिकर की दलील है कि इस सरकार ने 26 मई 2014 को कार्यभार संभाला था। लिहाजा इस योजना को सरकार संभालने के तुरंत बाद से लागू किया जा रहा है। नई पेंशन स्कीम के निर्धारण के लिए 2013 कैलेंडर साल को आधार माना जा रहा है।

परिकर ने कहा कि ओआरओपी लागू करने के बाद पेंशन के एरियर यानी बकाया राशि का भुगतान चार साल के भीतर हर छह महीने में की जाएगी लेकिन, युद्ध में शहीद हुए कर्मियों की विधवाओं सहित सभी विधवाओं को एरियर का भुगतान एकमुश्त किया जाएगा।

8,000 से 10,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ

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परिकर के मुताबिक ओआरओपी को लागू करने से सरकारी खाते पर 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जो कि भविष्य में और बढ़ता जाएगा। इतना नहीं नहीं सिर्फ एरियर के भुगतान में 10 से 12 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

परिकर ने साफ कर दिया कि फिलहाल स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने वाले अधिकारियों और कर्मियों को ओआरओपी का लाभ नहीं मिलने जा रहा है। हालांकि, सरकार इस मामले की समीक्षा कर रही है ताकि गंभीर रूप से घायल सैनिकों को इस श्रेणी से बाहर रखा जाए। सरकार ने कहा कि पेंशन की व्यवस्था और गणना की जटिलता के मद्देनजर पेंशन में एकरूपता बनाए रखने के लिए हर पांच साल पर इसकी समीक्षा की जाएगी।

साथ ही एक सदस्यीय न्यायिक समिति का गठन किया जा रहा है जो छह महीन में अपनी पहली रिपोर्ट देगी। आंदोलनकारियों का इन्हीं दो मुद्दों पर विरोध है। पूर्व सैनिकों का कहना है कि ओआरओपी की समीक्षा पांच साल के बजाए हरेक दो साल पर होनी चाहिए।

इसके अलावा न्यायिक कमेटी में एक सदस्य नहीं बल्कि पांच सदस्य होने चाहिए जिनमें तीन पूर्व और एक वर्तमान सैन्य अधिकारी हो। आंदोलनकारी वीआरएस लेने वाले सैनिकों को भी ओआरओपी योजना में शामिल करने की जिद पर अड़े हैं।

इन चार मुद्दों पर अटकी है बात

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पूर्व सैनिक ओआरओपी में किए गए प्रावधानों से संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन उन्होंने घोषणा का स्वागत किया है। आंदोलन की अगुवाई कर रहे मेजर जनरल (रिटायर) सतबीर सिंह ने कहा कि रक्षा मंत्री ने हमारी कई मांगें मानी हैं लेकिन कई मसलों पर अभी स्पष्टीकरण आना बाकी है। वन रैंक वन पेंशन से जुड़ी सारी मांगे पूरी होने के बाद ही आंदोलन खत्म होगा।

इन मुद्दों पर अटकी है बात

पेंशन समीक्षा
सरकार ने हर पांच साल पर पेंशन की समीक्षा की बात कही है, जबकि पूर्व सैनिक इसे हर दो साल पर करने की मांग कर रहे हैं।

आधार वर्ष
वन रैंक वन पेंशन की गणना के लिए 2013 के कैलेंडर वर्ष को आधार बनाया गया है और इसे जुलाई 2014 से लागू की जाएगी। 2013 की अधिकतम और न्यूनतम पेंशन के औसत के हिसाब से इसे तय किया जाएगा। पूर्व सैनिक इसे अप्रैल 2014 से लागू करने की मांग कर रहे हैं।

न्यायिक आयोग
सरकार ने ओआरओपी के विस्तृत क्रियान्वयन के लिए एक सदस्यीय न्यायिक आयोग के गठन की बात कही है, जो छह माह में रिपोर्ट देगी। पूर्व सैनिकों ने पांच सदस्यीय आयोग की मांग की है जिसमें तीन प्रतिनिधि पूर्व सैनिकों की हों और एक माह में रिपोर्ट दे।

वीआरएस का मसला
स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेने वालों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि, सूत्रों ने बताया कि घायल होने के कारण स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेने वालों को इसका लाभ मिल सकता है। पूर्व सैनिक वीआरएस लेने वालों को इसमें शामिल करने की मांग कर रहे हैं।

शर्तों के आधार पर वन रैंक वन पेंशन का ऐलान धोखा : कांग्रेस

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वन रैंक वन पेंशन के मुद्दे पर मोदी सरकार के फैसले को कांग्रेस ने निराशाजनक करार दिया है। पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी ने कहा कि सरकार ने पूर्व सैनिकों को सिर्फ निराश ही नहीं किया बल्कि उनको धोखा भी दिया है।

एंटनी ने कहा कि यूपीए सरकार ने पहले ही वन रैंक वन पेंशन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। तब पूर्व सैनिकों की पेंशन तीन बार बढ़ाई गई थी। कांग्रेस हमेशा से पूर्व सैनिकों के हितों के लिए बहुत गंभीर रही है। यूपीए सरकार का वन रैंक वन पेंशन प्रस्ताव एनडीए सरकार से काफी बेहतर था।

एंटनी ने कहा कि यूपीए सरकार ने बिना शर्त ही इसे लागू करने की बात कही थी। मगर एनडीए सरकार इसे शर्त लगा कर दे रही है। पूर्व सैनिकों का हक मारा जा रहा है। पार्टी ने कहा कि वह पूर्व सैनिकों के साथ है और उनके आंदोलन को समर्थन जारी रखेगी। पूर्व रक्षा मंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव में पूर्व सैनिकों से वायदा किया था कि वह सत्ता में आने के बाद 100 दिन के अंदर बिना शर्त वन रैंक वन पेंशन लागू कर देंगे।

मोदी ने यह वायदा 16 सितंबर 2013 को रेवाड़ी में किया था। एंटनी ने कहा कि वर्तमान वित्त मंत्री ने 10 अगस्त, 2014 को वन रैंक वन पेंशन का वायदा निभाने की बात करते हुए कहा था कि इसके लिए बजट में एक हजार करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। मोदी ने दीवाली पर सियाचिन ग्लेशियर और 31 मई को मन की बात कार्यक्रम में भी अपने वायदे को दोहराया था।

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