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सैमसन के बाद ईरा भास्कर ने भी दिया बोर्ड से इस्तीफा

Fri, 16 Jan 2015 11:21 PM IST
Updated Fri, 16 Jan 2015 11:21 PM IST
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govt has been meddling with every film including pk says leela samson

सेंसर बोर्ड के इनकार के बाद फिल्म ‘मैसेंजर ऑफ गॉड’ के प्रदर्शन को अनुमति के बाद विवाद गहरा गया है। इस मुद्दे पर सरकार और बोर्ड के बीच ठन गई है। बोर्ड के कामकाज में ‘हस्तक्षेप’ के कारण चेयरपर्सन पद से लीला सैमसन के इस्तीफे के बाद एक और सदस्य इरा भास्कर ने इस्तीफा दे दिया है।

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वहीं, फिल्म को अनुमति मिलने के खिलाफ शुक्रवार को सिख संगठनों ने पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया। फिल्म के 18 जनवरी को रिलीज होने की संभावना को देखते हुए पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। वहीं, डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह ने कहा है कि इस फिल्म में किसी धर्म पर निशाना नहीं साधा गया है।
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सेंसर बोर्ड के इनकार के बाद ‘फिल्म प्रमाणन अपीलीय न्यायाधिकरण’ ने फिल्म ‘मैसेंजर ऑफ गॉड’ को रिलीज करने की मंजूरी दे दी है। इस कारण बढ़े विवाद के बीच बोर्ड की सदस्य इरा भास्कर ने भी सैमसन का समर्थन करते हुए पद से इस्तीफा दे दिया।

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पैसे के चलते सालभर से नहीं हुई बोर्ड की बैठक

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सैमसन ने बृहस्पतिवार रात को इस्तीफा दिया था। भास्कर ने कहा कि उन्होंने मिलकर फिल्म की रिलीज रोकी थी, लेकिन चीजें ठीक तरीके से नहीं चल रही हैं। सैमसन ने बोर्ड के संचालन में मंत्रालय की सहायता की, लेकिन पिछले एक साल से बोर्ड के सदस्यों की कोई बैठक नहीं हुई।

सेंसर बोर्ड के सीईओ का कहना है कि उनके पास बैठक बुलाने के लिए पैसे नहीं है। ऐसे में स्पष्ट है कि अब बोर्ड की कोई जरूरत नहीं है। बोर्ड की एक अन्य सदस्य नंदिनी सरदेसाई ने भी सैमसन और भास्कर का समर्थन किया।

उन्होंने कहा कि हमने पूरी तरह से सिनेमेट्रोग्राफी कानून के तहत काम किया और पाया कि इस फिल्म को सार्वजनिक करना जनहित में नहीं है। फिल्म को रोकने संबंधी फैसला हम सभी का था।

24 घंटे में दी गई MSG को मंजूरी

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उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरण से सुनवाई की प्रक्रिया में सामान्य तौर पर 15-30 दिन का समय लगता है, लेकिन इस फिल्म को 24 घंटे के भीतर मंजूरी मिल गई। एक न्यायाधिकरण बनाया गया और फिल्म को पास कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि यह कुछ और नहीं बल्कि सैमसन को नीचा दिखाने की कोशिश है। सैमसन ने कामकाज में सरकारी हस्तक्षेप, दबाव और पैनल के सदस्यों में भ्रष्टाचार के कारण इस्तीफा देने की बात कही है।

हस्तक्षेप के सबूत दें सैमसन

सूचना प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्द्धन सिंह राठौर ने कहा है कि सरकार ने हमेशा से फिल्मों के प्रमाणीकरण से खुद को दूर रखा है। इन आरोपों के संदर्भ में सैमसन को सबूत देना चाहिए। ‘मैसेंजर ऑफ गॉड’ को मंजूरी देने में सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया।

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