सांप्रदायिक हिंसा विधेयक पर यूपीए दो-दो हाथ को तैयार

अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 22 Oct 2013 12:15 AM IST
विज्ञापन
govt gives a push to communal violence bill

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले यूपीए सरकार सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक पर विपक्ष के साथ दो-दो हाथ करने के लिए तैयार हो गई है।
विज्ञापन

भाजपा और कुछ क्षेत्रीय दलों के तीखे विरोध के बावजूद सरकार लंबे समय से धूल फांक रहे इस विधेयक को संसद के शीतकालीन सत्र में पेश करने की तैयारियों में जुट गई है।
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने भी यह कह कर सरकार का रुख साफ कर दिया है कि विधेयक पर काम शुरू हो चुका है।
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के रहमान खान ने भी मुजफ्फरनगर दंगों के मद्देनजर इस बिल को जल्द से जल्द कानूनी जामा पहनाने की वकालत की है।

खान ने उस दौरान भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, गृह मंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष से मुलाकात कर इस विधेयक को पारित कराने की मांग की थी। जबकि भाजपा ने आरोप लगाया है कि सरकार इस विधेयक के माध्यम से एक वर्ग विशेष को लुभाने के लिए बहुसंख्यकों के हितों की अनदेखी कर रही है।

मुजफ्फरनगर दंगों के बाद अल्पसंख्यकों की ओर से इस विधेयक को पारित कराने की मांग ने नए सिरे से जोर पकड़ा है। हालांकि इस घटना के बाद बुलाई गई राष्ट्रीय परिषद की बैठक में पहले की तरह ही इस पर विभिन्न दल अपनी पुरानी आपत्तियों पर कायम थे।

विरोध में है भाजपा
भाजपा जहां इस विधेयक को बहुसंख्यक विरोधी मानती है, वहीं कुछ क्षेत्रीय दल इसे संघीय ढांचे के खिलाफ मानते हैं। क्षेत्रीय दल कानून व्यवस्था राज्य का विषय होने का हवाला दे कर इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं।

क्या है विधेयक में
सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक में सांप्रदायिक हिंसा की स्थिति में केंद्र को सेना भेजने तथा हिंसाग्रस्त क्षेत्र में कानून व्यवस्था संभालने का अधिकार दिए जाने का प्रावधान है। दरअसल गुजरात दंगों की पृष्ठभूमि में ही यूपीए के पहली बार सत्ता में आने के बाद इस बिल को लाया गया था। मगर विवादों और आम सहमति के अभाव में यह विधेयक लंबे अर्से से लटका है।

चुनावी कार्ड के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी
यूपीए सरकार लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक को चुनावी कार्ड के रूप में इस्तेमाल करेगी। भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को गुजरात दंगों को लेकर निशाने पर ले रही कांग्रेस को अपनी सियासत के लिए यह विधेयक सूट भी करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us