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'तोते' को आजाद करने की जिम्मेदारी चिदंबरम को
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Wed, 15 May 2013 08:34 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट की बेहद सख्त टिप्पणियों के बाद आखिरकार केंद्र सरकार ने सीबीआई रूपी तोते को पिंजरे से आजाद करने की पहल कर दी है।
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शीर्ष अदालत की तीखी फटकार के बाद सीबीआई को स्वायत्त बनाने का कानूनी मसौदा तैयार करने के लिए प्रधानमंत्री ने मंगलवार को वित्त मंत्री पी चिदंबरम की अध्यक्षता में मंत्री समूह (जीओएम) का गठन कर दिया है।
जीओएम में गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल, विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद और कार्मिक राज्यमंत्री वी नारायणसामी को शामिल किया गया है।
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जीओएम अगले तीन सप्ताह में न केवल कानूनी मसौदा तैयार करेगा, बल्कि इस संबंध में शीर्ष अदालत में पेश होने वाले सरकारी हलफनामे का भी मसौदा तैयार करेगा।
कार्मिक मंत्रालय को जीओएम की बैठकों की तारीख और एजेंडा तय करने का जिम्मा दिया गया है।
यह फैसला सर्वोच्च अदालत के कोलगेट मामले में सीबीआई को सरकारी तोता बताए जाने और जांच एजेंसी को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने का कानून बनाने के निर्देश के बाद किया गया है।
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प्रधानमंत्री ने जीओएम को तीन हफ्ते में संबंधित मंत्रालयों, विभागों और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों से सलाह लेकर इस संबंध में कानून मसौदा तैयार करने का निर्देश दिया है।
सूत्रों के मुताबिक जीओएम सीबीआई को स्वायत्त बनाने के मामले में सभी संबंधित मंत्रालयों, विभागों के साथ-साथ सीबीआई की भी राय लेगा।
जीओएम को मुख्य रूप से यह तय करना है कि इस जांच एजेंसी को किस क्षेत्र में किस हद तक स्वायत्तता देने की जरूरत है। जिससे जांच में सरकारी दखल की गुंजाइश बाकी न रहे।
हालांकि पूर्ण स्वायत्तता देने से नए तरह का खतरा उत्पन्न होने के बारे में स्वयं जांच एजेंसी के निदेशक रंजीत सिन्हा ने भी आगाह किया है।
कानून का मसौदा तैयार करने के लिए जीओएम राजनीतिक दलों के साथ ही संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञों और संस्थाओं की भी राय जानेगा।
सरकार की योजना कानून का मसौदा तैयार करने के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाकर सभी राजनीतिक दलों की सहमति हासिल करने की भी है।
मालूम हो कि कोलगेट की जांच कर रही सीबीआई ने शीर्ष अदालत में हलफनामा देकर स्वीकार किया था कि स्टेटस रिपोर्ट में सरकार ने बदलाव कराए थे।
सीबीआई ने अदालत को यह भी बताया था कि स्टेटस रिपोर्ट को कोयला मंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय, कोयला मंत्रालय और विधि मंत्रालय के अधिकारियों ने देखा था।
सीबीआई की इस स्वीकारोक्ति से नाराज शीर्ष अदालत ने जांच एजेंसी को पिंजरे में बंद सरकारी तोता करार दिया था जिसके कई मालिक हैं।
अदालत की तीखी टिप्पणी और विपक्ष के दबाव में प्रधानमंत्री को इसी मामले में कानून मंत्री अश्विनी कुमार से इस्तीफा लेने पर भी मजबूर होना पड़ा था।
कौन है जीओएम में
वित्त मंत्री पी चिदंबरम (अध्यक्ष), संचार एवं कानून मंत्री कपिल सिब्बल, विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद, गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और कार्मिक राज्यमंत्री वी. नारायणसामी सदस्य होंगे।
क्या करेगा जीओएम
जीओएम सीबीआई को जांच के काम में बाहरी हस्तक्षेप से मुक्त करने के लिए कानूनी प्रावधानों पर विचार करेगा। जीओएम सीबीआई को स्वायत्त बनाने के कानून के मसौदे को तीन सप्ताह में तैयार करेगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में सौंपने के लिए हलफनामे का मसौदा भी तैयार करेगा। मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होनी है।