सरकारी कवायद फेल, बेकाबू हुए प्याज-दाल के दाम
प्याज और दाल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। सरकार इनके दाम घटाने में नाकाबिल साबित हो रही है। प्याज और दाल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।
पिछले एक माह से सरकार आम आदमी की इन खाद्य वस्तुओं की कीमतों को कम करने की कवायद कर रही है, जिसका ऐलान एक माह से भी पहले कर दिया गया था, लेकिन अब तक इन दोनों ही खाद्य वस्तुओं की कीमतें काबू में नहीं आई हैं।
खुदरा बाजार में प्याज के भाव अब भी 60 रुपये प्रति किलोग्राम हैं, वहीं दाल के दाम भी 150 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक हैं। अगस्त की शुरुआत में प्याज के भाव आसमान चढ़ने लगे थे, तब सरकार की तरफ से प्याज के आयात का फैसला किया गया।
केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय, उपभोक्ता मामले के मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय के मंत्री समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक की गई, जिसमें प्याज व दाल के दस-दस हजार टन के आयात का फैसला किया गया।
कमेटी भी कम नहीं करा पाई दाम
इन दोनों वस्तुओं की कीमतों पर निगरानी के लिए सरकार की तरफ से बाकायदा एक कमेटी बनाई गई, लेकिन डेढ़ माह बीत जाने के बावजूद कीमत कम करने की सरकार की कोशिश रंग नहीं ला पाई है।
अगस्त माह के आखिर में प्याज आयात के लिए मनोनीत सार्वजनिक कंपनी एमएमटीसी की तरफ से कहा गया कि 10 सितंबर तक आयातित प्याज की पहली खेप आ जाएगी, लेकिन अब अक्तूबर के पहले सप्ताह में आयातित प्याज के आने की बात की जा रही है।
सरकार के मुताबिक अक्तूबर के पहले सप्ताह में मात्र 1,000 टन आयातित प्याज आएंगे, जो प्याज के थोक कारोबारियों के मुताबिक ऊंट के मुंह में जीरा साबित होने वाला है।