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जासूसी बनी सिरदर्द, याहू-जी मेल होंगे 'बैन'

Wed, 30 Oct 2013 01:26 AM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 30 Oct 2013 01:26 AM IST
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govt could ban official use of gmail, yahoo by year-end

साइबर जासूसी से चिंतित केंद्र सरकार दिसंबर के अंत तक अपने कामकाज में इस्तेमाल होने वाली ई मेल सेवा याहू और जीमेल को हटा सकती है।

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सरकार अपने अहम और संवेदनशील आंकड़ों की सुरक्षा के प्रति बेहद चिंतित है, इसलिए सरकारी कम्यूनिकेशन में इन मेल सेवाओं को प्रतिबंधित किया जा सकता है।

डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी यानी डीईआईटीवाई सरकारी दफ्तरों और विभागों के लिए यह नीति बना रहा है। यह नीति जल्द ही बन कर तैयार हो जाएगी। अभी इस पर दूसरे मंत्रालयों की राय ली जा रही है।

डीईआईटीवाई के सचिव जे. सत्यनारायण ने सीआईआई के सम्मेलन के दौरान अलग से पत्रकारों को बताया कि सरकारी दफ्तरों के लिए ई-मेल नीति बन रही है। इसे दिसंबर के मध्य या आखिर में लागू किया जा सकता है।
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नई ई-मेल नीति से बड़ी तादाद में सरकार के अहम आंकड़े सुरक्षित रह सकेंगे। सरकार चाहती है कि उसके कामकाज के लिए निक.इन मेल सर्विस का ही इस्तेमाल हो। कर्मचारी और अफसर जीमेल, याहू या हॉटमेल जैसी ई-मेल सेवाओं का इस्तेमाल न करें।
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नई ई-मेल नीति नेशनल इनफॉरेमेटिक्स सेंटर की ओर से मुहैया निक.इन ई-मेल सेवा का इस्तेमाल करने वाले केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों पर लागू होगी।

सत्यनारायण ने कहा कि निक (एनआईसी) के इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में तुरंत चार-पांच करोड़ रुपये खर्च करने की जरूरत है। लेकिन ई-मेल पॉलिसी के बेहतर संचालन के लिए 50 से 100 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे। इसके अलावा ई-मेल सेवाओं को क्लाउड से भी जोड़ने की जरूरत है ताकि सरकारी आंकड़े सुरक्षित रह सकें।

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