सीपीआई नेता गोविंद पांसरे की मौत
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अज्ञात हमलावरों की गोलियों के शिकार बने महाराष्ट्र के वरिष्ठ सीपीआई नेता गोविंद पांसरे की मौत हो गई है। पिछले दिनों 16 फ़रवरी को कोल्हापुर में कुछ अज्ञात लोगों ने उन्हें गोली मार दी थी।
गंभीर हालत में शुक्रवार को उन्हें एयर एम्बुलेंस के जरिए मुंबई लाकर ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन शुक्रवार को रात 12 बजे के आसपास उन्होंने आखिरी सांस ली।
गोविंद पांसरे और उनकी पत्नी पर कोल्हापुर में उस समय जानलेवा हमला हुआ था जब दोनों सुबह टहलने जा रहे थे। पांसरे पिछले कुछ दिनों से कोल्हापुर में चल रहे टोल विरोधी आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल थे।
सोमवार की सुबह कोल्हापुर में अपनी पत्नी के साथ टहलने निकले पानसरे पर दो हमलावरों ने गोलियां चलाईं। हमले में उनकी पत्नी भी घायल हुई थीं जिनका कोल्हापुर में इलाज चल रहा है। उनकी पत्नी की हालत भी गंभीर है। पुलिस की तफ़्तीश जारी है लेकिन हमलावर अभी तक नहीं पकड़े गए हैं।
दाभोलकर की याद ताजा
पांसरे की मृत्यु ने 20 अगस्त 2013 को पुणे में हुई डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या की याद जगा दी। डॉ. दाभोलकर अंधविश्वास विरोधी आंदोलन का चेहरा थे।
सांप्रदायिक ताक़तों के विरोध में वे मुखर थे। दाभोलकर भी सुबह टहलने के लिए निकले थे जब उनपर करीब से गोलियां चलाई गई थीं। उनके हमलावर अभी तक पकड़े नहीं जा सके हैं।
पांसरे भी पिछले 50 वर्षों से प्रगतिशील आंदोलन के मुखिया रहे हैं। सांप्रदायिकता के विरोध में भी वे काफी सक्रिय थे। हाल ही में नथूराम गोडसे का महिमामंडन किए जाने को लेकर भी उन्होंने कड़ा एतराज जताया था।