व्यापमं के आरोपी राज्यपाल के बेटे की मौत
मध्य प्रदेश के राज्यपाल रामनरेश यादव के बेटे शैलेश यादव की लखनऊ में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। शैलेश व्यापमं घोटाले में आरोपी थे।
बताया जा रहा है कि व्यापमं घोटाले में शैलेश यादव को दो मामलों में आरोपी बनाया गया था। शुरूआती जानकारी के मुताबिक शैलेश की मौत ब्रेन हेम्रेज से हुई है।
खबर ये भी है कि जब से व्यापमं घोटाले में उन्हें आरोपी बनाया गया उसके बाद से ही वो काफी परेशान रहते थे। माना जा रहा है कि इसी वजह से उनकी मौत हुई है।
व्यापमं घोटाले में थे आरोपी
मध्य प्रदेश के राज्यपाल रामनरेश यादव के तीन बेटे हैं। जिनमें शैलेश यादव दूसरे नंबर के थे। वो लखनऊ में रहते थे। रामनरेश यादव उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं। जिसके चलते उन्हें एक बंगला आवंटित किया गया था। इसी बंगले में शैलेश यादव रहते थे।
व्यापमं घोटाले के दो मामलों में शैलेश यादव को आरोपी बनाने के बाद मध्य प्रदेश पुलिस दो बार पूछताछ के लिए लखनऊ आई थी। लेकिन दोनों ही बार उसे खाली हाथ लौटना पड़ा। बताया जा रहा है कि शैलेश कई दिनों से फरार थे।
बता दें कि मध्य प्रदेश में हुए व्यापमं शिक्षक भर्ती घोटाले में मध्य प्रदेश के राज्यपाल रामनरेश यादव भी अपने बेटे के साथ आरोपी बनाए गए हैं। ऐसे में उनके बेटे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
फिलहाल पुलिस मामले की तफ्तीश में जुट गई है। वहीं घोटाले के आरोपी की मौत के बाद इस मुद्दे पर सियासत गरमाने की संभावना बढ़ गई है। विपक्ष खास तौर से कांग्रेस लगातार इस मुद्दे पर राज्य सरकार पर सवाल उठाती रही है।
आखिर क्या है व्यापमं घोटाला?
मध्य प्रदेश के सबसे बड़े भर्ती घोटाले व्यापमं घोटाले को लेकर राज्य की शिवराज सिंह सरकार लगातार सवालों में हैं। इस घोटाले की जांच हाईकोर्ट ने पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम को सौंपी है।
जांच टीम ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए कई बड़े लोगों को गिरफ्तार किया है। 100 से ज्यादा आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जांच टीम छापेमारी कर रही है।
दूसरी ओर व्यापमं घोटाले को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को घेरने में जुटे हैं। उन्होंने मामले में शिवराज सिंह चौहान को भी आरोपी बनाने की मांग की है।
व्यापमं घोटाले में अब तक की कार्रवाई पर गौर करें तो इसमें सरकारी नौकरी में करीब एक हजार से ज्यादा फर्जी भर्तियां की गईं। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज में भी 514 फर्जी भर्तियों का शक जताया गया है। इस घोटाले में एक पूर्व मंत्री को गिरफ्तार किया गया है। उनके ओएसडी को भी गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ-साथ मुख्यमंत्री के पूर्व ओएसडी इसमें जांच के घेरे में हैं।