रुकेगा दहेज विरोधी कानून का दुरुपयोग!
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दहेज उत्पीड़न का झूठा आरोप लगाने वालों को अब मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। सरकार दहेज विरोधी कानून का दुरुपयोग करने वालों के लिए सजा या जुर्माने का प्रावधान कर सकती है।
पीटीआई के मुताबिक इस कानून के दुरुपयोग की बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर सरकार कड़े प्रावधान करने का मन बना रही है। इसके साथ ही दहेज विरोधी कानूनों को और धारदार बनाने की कोशिश हो रही है ताकि मौजूदा प्रावधान मजबूत हों और दहेज की परिभाषा का दायरा विस्तृत हो सके।
महिला और बाल विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि हाल में दहेज विरोधी कानून के दुरुपयोग के ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें महिलाओं ने झूठे मामलों में अपने पति और सास-ससुर को फंसाया है। जब ऐसे मामले झूठे साबित होते हैं तो कार्यवाही वहीं रुक जाती है। इसलिए सरकारी हलकों में अब इस बात पर विचार हो रहा है कि ऐसे आरोप लगाने वालों के खिलाफ सजा या जुर्माने का प्रावधान हो।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया है राज्यों सरकारों को निर्देश
हाल में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया था वे पुलिस को दहेज उत्पीड़न के मामले में धारा 498ए के तहत मामला दर्ज होते ही गिरफ्तारी का निर्देश न दें।
गिरफ्तारी तभी हो जब पुलिस को लगे कि आपराधिक कार्यवाही संहिता की धारा 41 के तहत इसकी सभी शर्तें पूरी हो रही हों। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश देते हुए नाराज पत्नियों की ओर से अपने पति और सास-ससुर के खिलाफ दहेज विरोधी कानून के दुरुपयोग पर चिंता जताई थी। कोर्ट का कहना था यह सास-ससुर के उत्पीड़न का कानून बन गया है।
कानून में बदलेगा दहेज शब्द का दायरा
महिला और बाल विकास मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक सरकार दहेज शब्द की परिभाषा का दायरा बड़ा कर सकती है। इसमें दहेज के संदर्भ में शादी के संबंध में शब्द को बदल कर शादी से पहले, शादी के समय और शादी बाद किसी वक्त किया जा सकता है।
अधिकारियों के मुताबिक घरेलू हिंसा कानूनों के कुछ प्रावधानों को दहेज विरोधी कानून से जोड़ा जा सकता है ताकि इस संबंध में पीड़ित को राहत मिल सके।
शादी में लेन-देन की देनी होगी सूची
अधिकारियों के मुताबिक शादी के वक्त उपहारों के लेनदेन की सूची बनाने को जरूरी बनाया जा सकता है। इसमें नाकाम रहने पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है और वर-वधू समेत उनके माता-पिता को तीन साल की सजा भी हो सकती है।
इस प्रावधान से दहेज के तौर पर दी जाने वाली चीजों के दावों की पुष्टि हो सकेगी। दहेज विरोधी कानून के दुरुपयोग के दौरान अक्सर यह आरोप लगाया जाता है कि अमुक चीज दहेज के तौर पर दी गई थी।
धारदार बनेगा मौजूदा कानून
सरकार दहेज उत्पीड़न के झूठे आरोपों में पति और सास-ससुर की प्रताड़ना की बढ़ते मामलों से चिंतित। लिहाजा अब इसके खिलाफ सजा या जुर्माने का प्रावधान की तैयारी।
सुप्रीम कोर्ट का नजरिया
हाल में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया था वे पुलिस को दहेज उत्पीड़न के मामले में धारा 498ए के तहत मामला दर्ज होते ही सीधे गिरफ्तारी का निर्देश न दें। गिरफ्तारी तभी हो जब पुलिस को लगे कि आपराधिक कार्यवाही संहिता की धारा 41 के तहत इसकी सभी शर्तें पूरी हो रही हों।