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जय जवान जय किसान नारे को बुलंद करेगी सरकार

Wed, 24 Jun 2015 08:58 AM IST
Updated Wed, 24 Jun 2015 08:58 AM IST
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government will raise the slogan Jai Jawan Jai Kisan

एनडीए सरकार सरदार पटेल और मदन मोहन मालवीय के बाद पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कांग्रेसी विरासत में सेंध लगाने की कोशिश में है। इसकी शुरुआत 1965 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध की 50वीं वर्षगांठ मनाकर की जाएगी।

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वन रैंक वन पेंशन, किसानों की बदहाली और भूमि अधिग्रहण बिल पर सवालों के घेरे में फंसी मोदी सरकार युद्ध के दौरान दिए गए शास्त्री के जय जवान जय किसान के नारे को अपने सुर में बुलंद करेगी। हालांकि योजना से जुड़े अधिकारियों को आशंका है कि इस समारोह की प्रतिक्रिया में कई नए विवाद खड़े हो सकते हैं।
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इसके लिए सितंबर महीने की शुरुआत से ही राजपथ, इंडिया गेट और जनपथ पर प्रदर्शनी, समारोह और वाद-विवाद आयोजित करने का ब्लू प्रिंट तैयार हो रहा है। इसकी अगुवाई खुद रक्षा मंत्री मनोहर परिकर कर रहे हैं।
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रक्षा मंत्री की देख रेख में ब्लू प्रिंट हो रहा तैयार

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इस योजना से जुड़े अधिकारी के मुताबिक 65 युद्ध में जीत के समारोह से पाकिस्तान भी अपनी जीत के दावे का बड़े पैमाने पर महिमामंडन कर सकता है। क्यूंकि यह ऐसा युद्ध था जिसमें दोनों देश अपनी जीत का दावा करते हैं। अधिकारी ने बताया कि सरकार यह जोखिम उठाने को तैयार है।

सूत्रों के मुताबिक इसी बहाने युद्ध समाप्ति के एक साल बाद ताशकंद में भारत पाकिस्तान समझौते के दौरान शास्त्री की रहस्यमयी मौत का मुद्दा भी उठाया जा सकता है।

गौरतलब है कि शास्त्री की मौत पर तत्कालीन सरकार की जांच रिपोर्टों पर देश का एक तबका यकीन नहीं करता। अभी तक की योजना के मुताबिक एक सिंतबर से 23 सितंबर तक अलग अलग जगहों पर समारोह आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए थल और वायु सेना को निर्देश दिया गए हैं।

शास्त्री की कथित रहस्यमयी मौत पर शुरु हो सकती है बहस

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1965 की युद्ध में पहली बार भारत की ओर से वायुसेना का इस्तेमाल किया गया था। सूत्रों के मुताबिक इस युद्ध के भारत सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की समीक्षा  की जा रही है। सेना के इतिहास विभाग के पास मौजूद इन दस्तावेजों का बड़ा हिस्सा अब भी गोपनीय है।

पाकिस्तान 7 सितंबर को इस युद्ध का विजय दिवस मनाता है। रिकार्ड के मुताबिक भारत ने पाकिस्तान के 1920 वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा किया था।

जबकि पाकिस्तान के हिस्से भारत की 550 वर्ग किलोमीटर आ गई थी। दस्तावेज के मुताबिक इस युद्ध के आखिरी दौर में पाकिस्तानी नौसेना ने कराची की ओर से गुजरात के द्वारका पर बमबारी की थी। लेकिन भारतीय नौसेना ने उसका कोई जवाब नहीं दिया था। 

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