फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   government will file petition election contest from jail

जेल से चुनाव लड़ने का अधिकार वापस मांगेगी सरकार

Fri, 02 Aug 2013 12:07 AM IST
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय Updated Fri, 02 Aug 2013 12:07 AM IST
विज्ञापन
government will file petition election contest from jail

राजनीति के बढ़ते अपराधीकरण पर अंकुश लगाने के मद्देनजर जेल में बंद अभियुक्त या पुलिस हिरासत में चल रहे व्यक्ति के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट से फिर से विचार करने की मांग केंद्र सरकार करेगी। सर्वोच्च अदालत में इस मुद्दे पर सरकार की ओर से अगले सप्ताह तक पुनर्विचार याचिका दायर कर दी जाएगी।

विज्ञापन


कानून मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक सरकार शीर्षस्थ अदालत को इस फैसले के दुष्प्रभाव और दुरुपयोग का हवाला देगी। पुनर्विचार याचिका में यह स्पष्ट किया जाएगा कि राजनीति के अखाड़े में विपक्षी दल इसका फायदा उठा सकते हैं।
विज्ञापन


इसके अलावा किसी भी व्यक्ति को राजनीति के मैदान से बाहर करने के लिए कोई प्रभावशाली व्यक्ति फैसले की आड़ में किस तरह से अपना स्वार्थ सिद्ध कर सकता है।

याद रहे कि फैसले में अदालत ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 62 (5) को जायज ठहराया है। इस धारा के तहत जेल में सजायाफ्ता कैदी, न्यायिक हिरासत या पुलिस हिरासत में चल रहे व्यक्ति को मतदान का अधिकार नहीं है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि मतदान के अधिकार से वंचित व्यक्ति लोकसभा या विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन


सर्वोच्च अदालत की ओर से 11 जुलाई को लिली थॉमस मामले में घोषित किए गए दो फैसलों में से यह एक था। जबकि पहले में आपराधिक मुकदमों में दोषी ठहराए जाने के बाद अपील लंबित रहने तक सांसदों, विधायकों को अयोग्यता से बचाने वाले कानून के प्रावधान को निरस्त कर दिया गया।

सर्वोच्च अदालत ने राजनेताओं को यह संरक्षण प्रदान करने वाले जन प्रतिनिधित्व कानून (आरपीए) की धारा 8(4) को गैरकानूनी करार देते हुए दोषी ठहराए जाते ही सांसद, विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने का फैसला दिया था।

हालांकि इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग को लेकर सरकार सर्वोच्च अदालत का रुख नहीं करना चाहती। लेकिन इस पर अगला कदम उठाने को लेकर सरकार के नुमाइंदों और कानून के जानकारों के बीच विचार-विमर्श जारी है।


जेल से चुनाव लड़ने के अधिकार को खत्म करने पर कानूनविदों से पुनर्विचार की मांग करने की हरी झंडी मिलते ही सरकार ने शीर्षस्थ अदालत जाने का निर्णय लिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed