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सीबीआई को 'आजाद' करने की दिशा में उठा पहला कदम

Tue, 25 Jun 2013 12:30 AM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Tue, 25 Jun 2013 12:30 AM IST
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government to form judges panel to oversee cbi investigations

बाहरी हस्तक्षेप से सीबीआई जांच को बचाने की कोशिशों के तहत केंद्र सरकार इसकी जांच पर निगरानी के लिए रिटायर जजों का एक पैनल बना सकती है।

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सीबीआई को स्वायत्तता देने के लिए गठित मंत्रियों का समूह (जीओएम) इस निष्कर्ष पर पहुंचा है। जीओएम अपनी रिपोर्ट 27 जून को कैबिनेट में पेश करेगी।

जीओएम के प्रस्तावित बदलाव पर एक बार कैबिनेट की मंजूरी मिल जाए, उसके बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट में 6 जुलाई को अपना हलफनामा दाखिल कर देगी। सर्वोच्च अदालत के इस मामले में 10 जुलाई को सुनवाई करने की संभावना है।
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आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि जीओएम ने सोमवार को बाहरी दखलंदाजी से जांच एजेंसी को आजाद के करने के तौर तरीकों पर अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप दिया।

इसमें सीबीआई द्वारा की जा रही जांचों की निगरानी के लिए रिटायर जजों की जवाबदेही समिति का गठन करने का सुझाव दिया गया।

इस सुझाव के साथ ही अन्य सिफारिशों को जीओएम 27 जून को कैबिनेट के सामने पेश करेगा, जहां इस पर अंतिम चर्चा होगी। जीओएम का नेतृत्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम कर रहे हैं।
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प्रधानमंत्री ने जीओएम का गठन सीबीआई को स्वतंत्रता देने और इसके संचालन को स्वायत्तता उपलब्ध कराने के लिए उचित नियम बनाने संबंधी मामले पर विचार के लिए किया था।

जीओएम जांच एजेंसी के प्रमुख की वित्तीय अधिकार को भी बढ़ाने पर सहमत हुआ। इसकी मांग सीबीआई द्वारा लंबे समय से की जा रही है।

'सीबीआई जांच में हस्तक्षेप न हो'
इधर कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि सीबीआई या अन्य एजेंसियों द्वारा की जा रही जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप न हो।


उन्होंने कहा कि हमने तय किया है और यही संविधान का मौलिक सिद्धांत भी है कि सीबीआई या किसी अन्य एजेंसी द्वारा की जा रही जांच में सरकार या किसी अन्य एजेंसी का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। हम इसके लिए प्रतिबद्ध हैं। हम महसूस करते हैं कि स्वायत्तता जवाबदेही के साथ मिलनी चाहिए।

मालूम हो कि उच्चतम न्यायालय ने कोल ब्लॉक आवंटन में कथित अनियमितताओं से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई को राजनीतिक आकाओं के पिंजरे में कैद तोता करार दिया था।

अदालत ने कहा था कि ऐसा कानून बनाने के प्रयास हों, जो सीबीआई को बाहरी प्रभाव या हस्तक्षेप से मुक्त करे।

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