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मजदूरों से बात करे सरकार नहीं तो फिर होगी हड़ताल

Fri, 22 Feb 2013 08:47 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 22 Feb 2013 08:47 PM IST
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government should talk to workers strike like to be

काम के बदले दाम की मांग करने वाले कामगारों से सरकार ने यदि बातचीत शुरू नहीं की तो एक बार फिर देशभर के श्रमिक संगठन हड़ताल करने को मजबूर होंगे।

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शुक्रवार को लोकसभा में शून्यकाल के दौरान भाकपा के गुरुदास दासगुप्ता ने इस मामले को उठाते हुए कहा कि सरकार के पास कॉरपोरेट कंपनियों से बात करने के लिए समय है, लेकिन उन कामगारों की बात सुनने का समय नहीं है जिन्हें काम का पूरा दाम नहीं मिल रहा है।
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देश में पिछले दो दिन तक श्रमिक संगठनों की देशव्यापी हड़ताल का जिक्र करते हुए दासगुप्ता ने कहा कि अगर सरकार ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों से सरकार यदि बात नहीं करती तो दोबारा हड़ताल की जाएगी। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिन तक देशभर में कर्मचारी संगठनों ने अनेक मांगों को लेकर हड़ताल की। इसमें वेतनमान बढ़ाने, सभी को पेंशन देने और महिला कर्मचारियों को मातृत्व सुविधाएं प्रदान करने जैसी मांगें शामिल हैं।
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श्रमिक संगठन पिछले तीन वर्षों से अपनी मांगो को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। श्रम संबंधी स्थायी समिति ने भी सिफारिश की है। लोकसभा में इस मुद्दे पर नियम 193 के तहत चर्चा हो चुकी है। इसके बावजूद सरकार ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया।


दासगुप्ता ने कहा कि श्रमिक हड़ताल नहीं चाहते, लेकिन सरकार इसके लिए मजबूर करती है। पिछले दिनों प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मीडिया के माध्यम से श्रमिक संगठनों से सिर्फ हड़ताल न करने की अपील की, जबकि उन्हें संगठनों के प्रतिनिधियों से सीधी बात करनी चाहिए थी।

उन्होंने पूछा कि क्या प्रधानमंत्री कॉरपोरेट जगत के लोगों से भी मीडिया के जरिये ही बातचीत करते हैं। दासगुप्ता ने कहा कि सरकार अहंकारी हो गई है। श्रमिकों को अपने हक की मांग के लिए हड़ताल करने का संवैधानिक अधिकार मिला हुआ है। माकपा नेता ने कहा कि जो लूटते हैं वहीं देश चला रहे हैं।

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