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वोटिंग नियमों के तहत चर्चा को तैयार दिख रही सरकार
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Thu, 29 Nov 2012 01:07 AM IST
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रिटेल में एफडीआई पर संसद में जारी सियासी घमासान में यूपीए सरकार अब अपनी ताकत आजमाने के लिए लगभग तैयार हो गई है। रूठे डीएमके से लेकर सपा और बसपा के रुख में आए बदलाव के बाद सरकार अब एनडीए और लेफ्ट की वोटिंग नियमों के तहत चर्चा की मांग को मानने के लिए तैयार दिख रही है। हालांकि सरकार ने अभी अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं, लेकिन वह इसका ऐलान स्पीकर से कराने की कोशिश में है।
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दूसरी ओर भाजपा ने फिर साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे पर चर्चा के बाद मत विभाजन की मांग से पीछे नहीं हटने वाली है। बुधवार को संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ के साथ लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली की बैठक में हालांकि कोई समाधान नहीं निकल पाया। लेकिन सूत्रों का कहना है कि रिटेल में एफडीआई के फैसले पर विपक्ष के भारत बंद को समर्थन दे चुकी चुकी डीएमके के अब सरकार के पक्ष में मतदान करने का ऐलान करने से सरकार अब विपक्ष की मांग मानने के लिए तैयार हो गई है।
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इधर सपा और बसपा भी कह चुके हैं कि वे सरकार की फजीहत नहीं कराएंगे। इससे अब बृहस्पतिवार सुबह सदन की कार्यवाही से पहले लोक सभा स्पीकर मीरा कुमार के साथ सभी दलों के नेताओं की होने वाली रुटीन बैठक में इस मसले पर कोई रास्ता निकलने की संभावना है। लोकसभा की कार्यमंत्रणा समिति की भी बृहस्पतिवार को ही बैठक है। इसमें अगले सप्ताह के पहले दो दिनों के भीतर इस विषय पर चर्चा कराने का समय तय हो सकता है।
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बहरहाल, सरकार के इस बदले रुख से अब संसद में जारी घमासान थमने के आसार दिखने लगे हैं। हालांकि सरकार की ओर से इस मामले पर सहमति का ऐलान नहीं हुआ है। इससे बृहस्पतिवार को भी संसद में हंगामे के आसार कायम हैं। इससे पहले बुधवार को सुषमा और जेटली ने कमलनाथ से कहा कि यदि सरकार के पास संख्याबल है तो वह मत विभाजन से क्यों भाग रही है।
सुषमा ने कहा कि एनडीए लोकसभा में नियम 184 और राज्यसभा में नियम 168 के तहत चर्चा कराने की मांग पर अडिग है। हालांकि कमलनाथ का कहना था कि चर्चा कराने का नियम स्पीकर पर छोड़ देना चाहिए। कमलनाथ ने स्पीकर मीरा कुमार से भी इस मामले पर चर्चा की। माना जा रहा है कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा कराने के नियम का ऐलान स्पीकर के जरिए कराने की तैयारी में है।
'एनडीए लोकसभा में नियम 184 और राज्यसभा में नियम 168 के तहत चर्चा कराने की मांग पर अडिग है।'
- सुषमा स्वराज, भाजपा नेता
'चर्चा कराने के नियम का मसला स्पीकर पर छोड़ देना चाहिए। सरकार वोटिंग के नियम में चर्चा कराने के खिलाफ नहीं है।'
- कमलनाथ, संसदीय मामलों के मंत्री
'चर्चा किस नियम के तहत होगी, लोकसभा स्पीकर की ओर से इसका ऐलान होने के बाद ही तृणमूल अपना रुख तय करेगी।
- सौगत राय, तृणमूल कांग्रेस
'यदि सरकार वोटिंग के नियम के तहत चर्चा कराने के खिलाफ नहीं है तो सरकार और कांग्रेस ने संसद के चार महत्वपूर्ण दिन बरबाद क्यों कर दिए।'
- वेंकैया नायडू, भाजपा नेता
लोकसभा के सदस्य
545
यूपीए के पास 265 सांसद
सपा (22) और बसपा (21) को मिलाकर आंकड़ा 300 के ऊपर
जबकि बहुमत के लिए जरूरी 273
राज्यसभा के सदस्य
244
यूपीए के पास 94 सदस्य
10 मनोनीत सदस्यों और तीन से चार निर्दलीयों का भी मिल सकता है समर्थन
सपा के 9 और बसपा के 15 सांसदों का समर्थन भी जरूरी