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सपा-बसपा के गोलमोल रुख से सरकार को राहत
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Fri, 23 Nov 2012 12:15 AM IST
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खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश के मसले पर संसद सत्र के पहले दिन ही सपा और बसपा के गोलमोल रुख से सरकार को राहत मिल गई है। दोनों दलों ने विपक्ष से मुकाबला करने की संजीवनी सरकार को दे दी है। उन्होंने संकेत दे दिया है कि वह नियम 184 के तहत बहस करवाने पर जोर नहीं देंगे।
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सपा-बसपा के सहारे अब सरकार का भी एफडीआई पर वोटिंग के प्रस्ताव को रोकने का हौसला बढ़ गया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि एफडीआई पर वह अपना रुख बहस के दौरान साफ करेंगी मगर बहस का नियम तय करना सरकार और स्पीकर का फैसला होगा। वहीं समाजवादी पार्टी के महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने कहा कि बेशक उनकी पार्टी एफडीआई के खिलाफ है मगर चर्चा का नियम तय करना स्पीकर के अधिकार में है। सपा किसी भी नियम के तहत बहस को राजी है।
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संसद सत्र के पहले दिन ही से एफडीआई पर वोटिंग के प्रस्ताव पर दोनों पार्टियां खुलकर नहीं बोल रही है। मगर इन्होंने साफ संकेत दे दिया है कि वे लोकसभा में वोटिंग के नियम 184 के तहत एफडीआई पर चर्चा के हिमायत में नहीं है। सपा ने हालांकि एफडीआई का कड़ा विरोध किया है। उधर मायावती ने तो एफडीआई का विरोध करने से ही परहेज किया है। दोनों दलों ने स्पीकर और केंद्र सरकार के पाले में गेंद डालकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की है।
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मायावती ने कहा कि अभी स्पीकर और केंद्र ने ही तय नहीं किया है कि किस नियम के तहत चर्चा हो तो वह इससे पहले ही अपना रुख कैसे तय कर लें। सपा के रामगोपाल यादव ने भी इसी तरह से जवाब दिया। उनका कहना था कि स्पीकर ही अभी नियम तय नहीं कर पाई हैं तो पार्टी कैसे अपना फैसला पहले ही ले लेगी। रामगोपाल यादव ने कहा कि पार्टी पहले दिन से ही रिटेल एफडीआई की मुखालफत की है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि प्रदेश में इसे लागू नहीं किया जाएगा।