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हड़ताल खत्म कराने के समझौते से मुकर नहीं सकती सरकार
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय
Updated Sat, 19 Jan 2013 07:48 PM IST
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सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि कर्मचारियों की हड़ताल को खत्म कराने के लिए किए गए समझौते से सरकारें मुकर नहीं सकती। ऐसे समझौतों में किए गए वादों को पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार के खिलाफ पटना हाईकोर्ट के एक आदेश को जारी रखते हुए यह फैसला दिया है। साथ ही समझौते में किए गए वादों का क्रियान्वयन तीन माह में करने का आदेश दिया।
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सर्वोच्च अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि गैर अध्यापन कर्मचारियों की हड़ताल खत्म कराने के लिए राज्य सरकार ने कई बार छात्रों के हितों का हवाला दिया। उस दौरान कई बार कर्मचारियों की मांगें पूरा करने का वादा किया गया, जिसे पूरा नहीं किया गया।
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फिर से हुई हड़ताल को तोड़ने के लिए सरकार ने लिखित समझौता तक कर लिया पर मांगों को पूरा नहीं किया। ऐसे में हाईकोर्ट की ओर से छात्र द्वारा भेजे गए पत्र को जनहित याचिका के तौर पर मानकर राज्य सरकार को जारी किया गया आदेश शत-प्रतिशत सही है, क्योंकि हड़ताल को खत्म कराने के समझौते से सरकार मुकर नहीं सकती।
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जस्टिस पी. सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने बिहार सरकार की याचिका को खारिज करते हुए तीन माह में समझौते में किए गए वादों को लागू करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने 7 अगस्त, 08 को राज्य सरकार को एक माह में समझौते को लागू करने को कहा था। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने शीर्षस्थ अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने बिल्कुल सही कहा है कि हड़ताल तोड़ने के लिए सरकार की ओर से कोरा वादा उचित नहीं। समझौते के तहत सरकार को कर्मचारियों के वादों को पूरा करना चाहिए। याद रहे कि राज्य सरकार से कर्मचारियों की ओर से भत्तों में बढ़ोतरी किए जाने सहित अन्य मांगें की गई थीं जिनके पूरे न करने पर जुलाई, 03 में कर्मचारियों ने हड़ताल की।
सरकार ने बातचीत के जरिए समझौता कर हड़ताल खत्म कराने के लिए मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया। वर्ष 2005 तक मांगों को पूरा न किए जाने पर कर्मचारी संगठन ने फिर से हड़ताल घोषित कर दी। इस बार भी सरकार ने आश्वासन देकर हड़ताल खत्म करा दी। तीसरी बार जुलाई, 07 में कर्मचारियों ने हड़ताल खत्म करने को लिखित समझौता किया जिसमें सरकार ने मांगों को पूरा करने को कहा पर ऐसा हुआ नहीं।
ठीक एक साल बाद फिर हड़ताल होने पर विश्वविद्यालय के एक छात्र ने हाईकोर्ट को पत्र लिखकर सरकार की सीनाजोरी की शिकायत की। छात्र के पत्र को जनहित याचिका मानकर हाईकोर्ट ने सरकार से कर्मचारियों के साथ हुए समझौते को लागू करने का आदेश दिया। इस आदेश को जायज ठहराते हुए सर्वोच्च अदालत ने भी कर्मचारियों को राहत दे दी।