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यूपीएससी की मुख्य परीक्षा के नए प्रारूप पर विचार
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Mon, 18 Mar 2013 01:33 AM IST
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केंद्र सरकार संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा संचालित प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा के मुख्य एग्जाम में अंग्रेजी भाषा की परीक्षा को अनिवार्य बनाने वाले प्रावधान को खत्म करने पर विचार कर रही है।
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अंग्रेजी भाषा में उत्तीर्ण होने को अनिवार्य बनाने संबंधी केंद्र सरकार के कदम का सपा, राजद, वामदलों, अकाली दल, नेशनल कांफ्रेंस, एआईएडीएमके, डीएमके और भाजपा ने कड़ा विरोध किया था।
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इससे पहले अंग्रेजी का पेपर केवल उत्तीर्ण करना होता था और इसके अंक उम्मीदवार के चयन के लिए तैयार परिणाम में नहीं जोड़े जाते थे।
कार्मिक, जन शिकायत और पेंशन मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि अंग्रेजी भाषा को अनिवार्य बनाने संबंधी प्रावधान को मुख्य परीक्षा से हटाकर एक नए प्रारूप को पेश करने की तैयारी की जा रही है।
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मंत्रालय ने यूपीएससी से विचार विमर्श के बाद इस संदर्भ में जारी अधिसूचना पर रोक लगा दी थी। नए प्रारूप में ऐसी व्यवस्था की जा सकती है, जिसके तहत अंग्रेजी भाषा के अंकों को उम्मीदवारों के अंतिम चयन में नहीं जोड़ा जाएगा। सूत्रों ने बताया कि यूपीएससी के अधिकारियों के साथ इस संबंध में जल्द ही बैठक की जाएगी।
यूपीएससी भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस), भारतीय वन विभाग (आईएएफओ) तथा भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) एवं अन्य सेवाओं के अधिकारियों का चयन करता है। बैठक में रोडमैप पर विचार विमर्श कर इस संबंध में अंतिम फैसला लिया जाएगा।
हालांकि यूपीएससी की अधिसूचना पर रोक से 26 मई को होने वाली सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा प्रभावित नहीं होगी। कार्मिक मंत्रालय ने 5 मार्च को सरकारी गजट में अधिसूचना प्रकाशित कर सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा में कुछ बदलाव किए थे। इसके तहत अंग्रेजी तथा सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्रों को अधिक वरीयता दी गई थी।